Saturday, 19 August 2017

पैबंद

मन्नतों के रॉकेटों से किए हमने उसकी झोली में सुराख़ इतने
कि ख़ुदा को अपने आसमाँ पे सितारों के पैबंद लगाने पड़ गए

-तुषारापात®

Friday, 4 August 2017

इंद्रधनुष

पथ से मुझे रपटा कर
हो रहा तू अति प्रसन्न!
देवताओं के राजा!
अपना धनुष दिखा कर
मत कर शक्ति प्रदर्शन!

वर्षा वृष्टि द्वारा
कर तू मार्ग जलमगन
नौका का निर्माण कर
करूँगा मैं पथगमन

मेघों की गर्जना से
काँपते नहीं 'सिंह' के पैर
देवेंद्र होकर रखता तू
एक मानव मात्र से बैर

स्वर्गों की नहीं
चाह मुझे न कामना
मेरा लक्ष्य तुझे
तेरा राज्य लाँघना

मैंने बैर लिया है
संसार के स्वामी से
मेरे अंतर की पीड़ा
न पढ़ने वाले अंतरयामी से

मैं एक हूँ और वो है एक
फिर क्यों मैं तुच्छ वो है श्रेष्ठ
पिता है वो तो मैं हूँ उसीका पुत्र
तेरा क्या तू है मात्र सेवक ज्येष्ठ

मत बन अवरोधक
मत भूल अरे दुष्ट!
मेरे यज्ञ की भिक्षा से
होता आया तू पुष्ट!

दे दिया था दान तुझे
पहले ही अपना आसन
बैठता गर्वित हो तू जिसपर
कहलाता वो आज भी 'सिंहासन'

बंद कर अपना यह जलाघात
मत दिखा मुझे यह इंद्रधनुष
खंडित होगा निमिष मात्र में
प्रचंड 'तुषारापात' है यह मनुष!
प्रचंड 'तुषारापात' है यह मनुष!

-तुषारापात®

Monday, 31 July 2017

पाउडर

आसमाँ की पीठ पे
फेरो जो हाथ
तो दरदारती हैं
सितारों की पट्टियाँ

रात को चमकते हैं
गुनाह सूरज के
धूप से हुईं हैं ये
आसमाँ को घमौरियाँ

चाँद के डब्बे से
कोई पाउडर लगाता है
आसमाँ की पीठ पे
छाईं हैं सुफेद बदलियाँ।

-तुषारापात®

घमौरियाँ

सितारे
धूप से पैदा हुईं
घमौरियाँ हैं
आसमाँ की पीठ पे
पाउडर लगा गया कोई
बहुत से सफेद बादल आज छाए हैं।

-तुषारापात®

Saturday, 29 July 2017

चराग़

यूँ पलकें झपका के,कहीं,किसी का रस्ता तकते हैं?
तुम्हें देखने की मुराद में,हम आँखों के चराग़ मलते हैं

-तुषारापात®

Thursday, 27 July 2017

मेरा कुछ सामान (मेल वर्जन)

मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास पड़ा है
जेठ की तपती दोपहरियां हैं कुछ
पानी की बोतलों पे चिपके होंठ पड़े हैं
वो निशान मिटा दो मेरा वो सामान लौटा दो

बहारें हैं कुछ,देखो,हैं न
पेड़ों के नीचे कुचले वो पीले फूल पड़े हैं
मेहंदी से पहले जिनसे हथेलियां पीली की थीं
वो रंग छुटा दो,मेरा वो सामान लौटा दो

एक सौ सत्रह बरसातें,एक तुम्हारी तौलिये पे बिंदी
सौंधी सौंधी ज़ुल्फ़ की खुशबू,नींबू वाली चाय की चुस्की
जलते स्टोव की आँच में मेरे कुछ अरमान पके थे
वो अरमान दबा दो,मेरा वो सामान लौटा दो

एक अकेली चादर में जब आधे आधे जाग रहे थे
आँखें मूँदें,लब चूमें,आधी आधी बाहों में थे पूरे पूरे
सर्दियों की उस रात जो पी लीं थीं तुमने
मेरी वो साँसे कम पड़ गईं हैं
वो भिजवा दो,मेरा वो सामान लौटा दो

एक इज़ाजत दी थी तुमको
वो वापस भिजवा दो
या मुझको भी साथ दफ़ना लो।

-तुषारापात®

Tuesday, 25 July 2017

आलू टमाटर

टमाटर सौ के पार हुआ पर आलू
रुपैये बीस में दो किलो आते क्यों हैं?

उनके टमाटर जैसे रुख़सारों पर
ज़माने भर के आलूओं की आँखें जो हैं।

-तुषारापात®

Monday, 24 July 2017

बिरहम्मा

दिल में लहू की बगावत के जैसे
तुम मुझमें हो मेरी ख़िलाफ़त के जैसे

पैरों में बाँध के जरूरत के घुँघरू
ज़िंदगी नाचती है तवायफ़ के जैसे

वो बुदबुदाता है पाँचों वक्त आयतें
ख़ुदा के कानों में शिकायत के जैसे

लगके गले पीठ ख़ंजर से थपथपा के
मोहब्बत दिखाता है अदावत के जैसे

चढ़ती जवानी का है ये मुआमला
दबे पाँव उतरती शराफत के जैसे

दफ़्न है मुमताज़ शाहे जहाँ के सीने में
दिल है ताजमहल की बनावट के जैसे

के काफ़िरों ने ईज़ाद करके इक नया ख़ुदा
मोमिनों से किया हिसाब क़यामत के जैसे

तू शायिर है 'तुषार' बिरहम्मा तो नहीं
लिखेगा ख़ाक उसकी लिखावट के जैसे

#तुषारापात®

Thursday, 20 July 2017

वक्त का तमंचा

पत्थर रख लो छाती पे..मोहर लगेगी छोटे हाथी पे..अरे पत्थर रख दो छाती पर..मोहर लग रही..लग रही...छोटे..छोटे हाथी पर." दो जीपों में ठुंसे और अनेकों मोटरसायकल पे सवार लड़के,सड़कों और गलियों में घूम घूम के ये नारे लगा रहे थे,उनकी गाड़ियों पे लगे पार्टी के नीले झंडे उतने नहीं लहरा रहे थे जितने वो युवक अपने वाहन लहरा रहे थे।

लखनऊ उत्तरी विधानसभा के वार्ड नम्बर 72 बजरंग बली वार्ड से 'बहनजी श्रॉप पार्टी' के सभासद प्रत्याशी बब्बन के लिए चुनाव प्रचार में राघवेंद्र,पिंटू और बब्बन का छोटा भाई सतीश जोर शोर से लगे थे। ये तीनो हमउम्र थे और आपस मे दोस्त थे जिसमें राघवेंद्र और पिंटू लखनऊ यूनिवर्सिटी से बी.कॉम कर रहे थे लेकिन सतीश आठवाँ पास था या फेल ये रहस्य बस ये तीनो ही जानते थे,बब्बन निम्न मध्य वर्ग से था जिसने इस चुनाव के लिए डंडइया मार्केट में अपनी रेडीमेड कपड़ों की चलती दुकान तक गिरवी रख दी थी।

"अबे..ये कहाँ से मारा..तुमने..सॉलिड है यार.." पिंटू ने राघवेंद्र के हाथ से तमंचा लेते हुए कहा,तीनो एक पान की दुकान पे रुके थे,बब्बन  अपने चुनावी काफिले के साथ आगे बढ़ गया था

राघवेंद्र ने उसके हाथ से कट्टा वापस लिया और बोला "मारा नहीं है बे.. खरीदा है..हरदोई का बना है..सॉलिड 312..नाल देखी तुमने इसकी.. ट्रक के स्टेरियिंग से बनी है.. कट्टा नहीं तोप है ये तोप"

"अमा..टेस्ट किया है इसे..या ऐसे ही बढ़ा चढ़ा के फेंके जा रहे हो" सतीश ने सिगरेट का कश लगा के सिगरेट राघवेंद्र को पकड़ाते हुए कहा

"नहीं बे..चलाये नहीं हैं..अभी..बस पसंद आया तो शौकिया खरीद लिए.." राघवेंद्र सिगरेट फूँकने लगा सतीश ने उससे तमंचा लिया और कहा "तो इधर लाओ..टेस्ट करके..देंगे कल.."

"अरे..मगर..चलो अच्छा..ठीक है..लेकिन कल लौटा देना ध्यान से" राघवेंद्र ने अनमने मन से कहा, तभी वहाँ से दूसरे प्रत्याशी के समर्थन में बहुत सारे लोग शोर मचाते नारे लगाते निकले "चप्पा चप्पा.. कमलगट्टा... कहाँ पड़े हो चक्कर में...कोई नहीं है टक्कर में..चप्पा.." सतीश भीड़ की तादात देख के मुँह बनाता है और गालियां बुदबुदाने लगता है,गुटखे के कई सारे पैकेट खरीद,तीनों वहाँ से बढ़ के फिर से अपने जुलूस में शामिल हो जाते हैं।

ऐसे ही कई दिनों तक ये तीनो चुनाव प्रचार में लगे रहते हैं राघवेंद्र ने कई बार सतीश से तमंचा वापस मांगा पर सतीश कोई न कोई बहाना बना देता,सतीश की नीयत नहीं थी कट्टा वापस करने की। एक दिन जब राघवेंद्र सख़्ती के साथ वापसी की बात कहता है तो सतीश उसकी ओर तमंचा तान देता है "एक बार और अगर तमंचा तमंचा किए तो तमंचा नहीं गोली मिलेगी..वो भी पिछवाड़े में"

राघवेंद्र अचंभित रह जाता है "वक्त वक्त की बात है सतीश..दोस्त के लिए गोली खाने की बात वाले..आज दोस्त पे ही तमंचा तान रहे है.. कभी आगे जब तुम्हारा खराब वक्त आएगा तो..दोस्त काम आएगा तमंचा नहीं"

"जिसके हाथ मे ये होता है न..वक्त उसी का होता है..और तमंचा न बुरे वक्त को भी गोली मारे रहता है.." सतीश ने कट्टा लहराते हुए कहा, राघवेंद्र मायूस होकर वापस लौट आता है।

"साले..तुममें दम नहीं है...बब्बन के कारण..तुम्हारी सतीश से फटती है..तुम्हारी जगह कोई और होता तो गिरेबान दबोच के अपना सामान वापस ले लेता..छक्के हो तुम..." पिंटू और साथ के कई लड़के कभी राघवेंद्र के सामने तो कभी उसके पीठ पीछे कुछ इसी तरह की बातें किया करते और उसका मजाक उड़ाया करते थे।

राघवेंद्र ने किसी को कोई जवाब नहीं दिया..वो समझ चुका था कि इस लाइन में कोई भविष्य नहीं है जहाँ एक ज़रा सी चीज के लिए दोस्त ही दोस्त का दुश्मन बन जाए..वो इन सभी लोगो से सदा के लिए दूर हो गया। इसी बीच चुनाव परिणाम घोषित हुए बब्बन की जमानत जब्त हो गई राघवेंद्र इन सबसे अनजान बना अब अपनी पढ़ाई को गंभीरता से ले रहा था।

"मेरे इंद्र देवता..मेरे पास कोई ढंग की साड़ी नहीं है..कल की पार्टी के लिए क्या 'बैंक के अफसर बाबू' मुझे एक साड़ी दिलाने ले चलेंगे" बैंक से लौट के घर आए राघवेंद्र से उसकी पत्नी शकुंतला ने गले लगते हुए कहा

"ठीक है..चलते हैं..पहले जरा चाय वाय तो पिलाओ भाई.." राघवेंद्र ने हँसते हुए कहा, चाय पीकर वो दोनों कपूरथला चौराहे पे स्थित गीता वस्त्रालय से साड़ी खरीदने निकल जाते हैं शोरूम के बाहर सड़क पर कर रोक कर राघवेंद्र कहता है "शकु तुम चलो..मैं ज़रा गाड़ी खड़ी करने की जगह ढूँढता हूँ" शकुंतला कार से उतर के शोरूम में चली जाती है

राघवेंद्र सात आठ मिनट बाद कार खड़ी कर शोरूम में दाखिल होता है गीता वस्त्रालय का मैनेजर उसे पहचान कर अभिवादन करता है "नमस्कार राघवेंद्र साहब..मैडम उधर हैं..कर्मचारी उन्हें साड़ियाँ दिखा रहा है..राघवेंद्र उसे धन्यवाद देकर शकुंतला के पास जाकर  पूछता है "हाँ..भाई.. आई कोई साड़ी..तुम्हें पसंद.."

उसकी आवाज़ सुनकर साड़ी दिखाने वाला व्यक्ति उसकी ओर देखता है राघवेंद्र भी उसे देखता है दस साल के बाद सतीश और राघवेंद्र फिर आमने सामने थे लेकिन आज सतीश की नज़र लहरा रही थी.. गोली न उस दिन चली थी न आज चली...आज वक्त का तमंचा चला था जिसपे सब्र का साइलेंसर लगा हुआ था।

-तुषारापात®

Wednesday, 19 July 2017

जागता शहर जागता शायर: मुम्बई

यहाँ रहते हैं लोग चलती सड़कों के फुटपाथों पे ऐसे
बहती नदियों के किनारों पे आदम सभ्यताएं हों जैसे

-तुषारापात®

Monday, 17 July 2017

एक लंबी कहानी का छोटा सा अंश

उसने एक हाथ से मुझे कमर से साध रखा था और उसके दूसरे हाथ की खुरदरी उंगलियाँ मेरे चेहरे पे यहाँ वहाँ फिर रही थीं मानो कोई कुशल वीणावादक अपने अवसान काल में वीणा का भार भी संभाल रहा हो और काँपते हाथों से वीणा के तारों को झंकृत भी कर रहा हो,जानती हूँ..तुम उतने कुशल नहीं रहे और इस वीणा के तार भी जंग खा चुके हैं..फिर भी सावन की इस उमस भरी दोपहरी में ये जो संगीत तुम मुझमें जगा रहे हो...ये वासना नहीं..देह की कामना नहीं वरन..ये तो देह की साधना है..ये संगीत ही प्रेम है..मेरी झुर्रियों के तारों से खेलतीं तुम्हारी खुरदरी काँपती उँगलियाँ का संगीत!

-तुषारापात®

Sunday, 16 July 2017

असमरथ का कोउ मित्र न भाई

साल के बनाम दिन ने मुकदमा दर्ज कराया
वक्त की अदालत में लम्हें बयान से मुकर गए

-तुषारापात®

लम्हों की फसल

किसी की जुदाई का दिन कुछ पलों को उसमें बो गया
न काटी गईं रातों के लम्हों की फसल लहलहा रही है
खबर पक्की है उसकी नई किताब जल्द आ रही है।
#तुषारापात®

Saturday, 15 July 2017

दाल

जिसे अपनी दाल गलाने का हुनर आता है वो पतीले से प्रेशर कुकर पे झट से पहुँच जाता है।

Thursday, 13 July 2017

चौराहा

मुसाफ़िरों में कहाँ नाकामियां पनाहें करतीं हैं
एक राह काटती है रस्ता तो चार राहें बनतीं हैं

-तुषारापात®

Tuesday, 11 July 2017

पूर्णिमा का सूरज-प्रतिपदा

"पूरी दिल्ली फाँद के यहाँ रहते हो?..आई मीन...तुझे कौन सा किसी मल्टीनेशनल कंपनी में ड्यूटी बजानी होती है..दिलदारों की दिल्ली छोड़ के..चित्रकार साहब यहाँ पड़े हैं" रात के ग्यारह बजे सोसाइटी के गेट पे मुझसे गले लगते हुए उसने कहा

"मानेसर..दिल के बहुत करीब है..यहाँ मेरा मन एक सेर का हो जाता है" मैं उसे लिए लिफ्ट की ओर चलने लगा और मुस्कुराते हुए आगे बोला.."और वैसे भी..दिल्ली के लोगों के लिए दिल,दिल बहलाने का शगल है..लगाने का नहीं..तुम्हारी दिल्ली के लोग आँख के आँसू भी तब ही पोछते हैं जब उन्हें नोट गिनने के लिए अपना अँगूठा तर करना होता है"

उसने रुककर मुझे एक पल देखा और मेरी आँखों में देखते हुए बोला "सेर का तो पता नहीं पर ये मन,मन भर भारी तो दिख रहा है" और फिर हँसके आगे बोला  "बेटा सूरज इस आलोक बाबा बंगाली का ये ज्ञान दिमाग में फिट रखो..कि मेट्रो के पिंक कम्पार्टमेंट को बस दूर से देखना चाहिए... उसमें सफर करने वाले का तो कटता ही है..कभी चालान.. तो कभी चूतिया..." उसने बात को हल्का करने के लिए जानबूझकर मज़ाक किया और हँसने लगा मैं भी उसके साथ मुस्कुराने  लगा, थोड़ी ही देर में हम दोनों छठे फ्लोर पे मेरे फ्लैट में पहुँच चुके थे।

बालकनी में पड़ी दो कुर्सियों पे दोनों ढेर हुए,उसने सिगरेट की डिब्बी मेरी ओर बढ़ाई मेरे मना करने पे एक सिगरेट सुलगा के मुझसे बोला "देख जो हुआ उसे छोड़..आगे बढ़..पुरानी यादों के मुर्दा फूलों से  ख़ुश्बू नहीं बासी बदबू आती है"

"मम्मी से मिलके आया न?" मैंने बीयर का एक कैन खुद के लिए खोल लिया और एक उसकी ओर बढ़ाते हुए पूछा,मेरे सीधे सवाल से वो थोड़ा सा अनकम्फर्टेबल होते हुए बोला "हाँ तो?..किस माँ को अपने जवान बेटे का पारो पारो चिल्लाके पागल होना अच्छा लगता है." उसने बीयर का एक घूँट लगाया और आगे कहने लगा "पूर्णिमा की शादी हुए अब साल भर हो रहा है...एक बुरे सपने के चक्कर मे अगला दिन खराब करना सूरज का काम तो नहीं होता"

कैन को बालकनी की रेलिंग पे रख,सिगरेट सुलगा मैंने सामने उँगली दिखाते हुए उससे पूछा "जानता है वो दूर..सामने क्या है?"

अपनी बात का जवाब न पाकर उल्टे मेरे इस सवाल से वो खीजता हुआ बोला "अबे..जयपुर हाइवे है..जिसपर ट्रक आ रहे हैं..जा रहे हैं..और मैं यहाँ उन्हें निहारते हुए एक आशिक के साथ अपना सर फोड़ रहा हूँ.."

"ये हाइवे नहीं उसके गुलाबी शहर को जाता काला रस्ता है..और उस शहर को जाते ये ट्रक..ट्रक नहीं..पोस्टकार्ड हैं..जिनके दो कोनों पे टॉर्च लगी है..ताकि आगे वाले पोस्टकार्ड अंधेरे में भी पढ़े जा सकें..मैं यहाँ बैठकर आते हुए पोस्टकार्डों के जवाब पढ़ता हूँ..शायद किसी दिन कोई पोस्ट कार्ड मेरे नाम का..." यादों की बियर का कैन खुल चुका था और मेरी बातों में बीता वक्त फेने सा निकलने लगा

"साले पेंटर..वो तो शशि के साथ मजे से जयपुर में सेट होकर अपनी रातें गुलाबी कर रही होगी..उसके लिबास के लिफाफे पे अब पति नाम का स्टैम्प है..और तू यहाँ पोस्टमैन-पोस्टमैन खेल रहा है..भूल जा उसके वादे को..वो अब नहीं आएगी" उसने नया कैन खोलते हुए मेरी ओर देखे बगैर कहा और बात कहकर कैन मुँह से लगा लिया

थोड़ी देर के बाद उसने 'खान चाचा' के बिरयानी के पैकेट को मेरी ओर बढ़ाया मैंने पैकेट को एक तरफ रखा और हाइवे को देखते हुए उससे कहा "इश्क में रंगे खुले पोस्टकार्ड अक्सर शादी के लिफाफों में कैद हो जाते हैं..पर उनमें से कुछ..लिफाफों का स्टैम्प हटा के वापस अपने सही पते पे भी आते हैं..ऐसी बेरंग डाक जल्दी आती है..पर लिफाफों का लिबास उतारकर आने वाले पोस्टकार्ड अक्सर देर से आते हैं.."

उसने आधी खाई बिरयानी का पैकेट एक ओर रख चलने का इशारा किया और जाते जाते कह गया "व्हाट्सएप्प के ज़माने में चिठ्ठियों वाला प्यार रद्दी के भाव बिकता है।"

-तुषारापात®

Monday, 10 July 2017

तिलमिलाता सावन

सावन आकर,गुस्साकर,ज़ोर से बरसता है
आषाढ़ की छुटपुट बारिश में,तुम क्यों भीगीं थीं ?
जेठ जाते ही सब्र तोड़ा,बस इक महीने की तो देरी थी

-तुषारापात®

Sunday, 9 July 2017

सूखा सावन

रंगीन नई बारिशें
आँगन में
रोज़ उतर आती हैं
हम
इस सावन भी
यादों की काली
पुरानी छतरी खोले बैठें हैं
पलकें सूखीं,आँखें गीलीं
भीगे मन को प्यासे तन से,बाँधे बैठे हैं   -तुषारापात®

Saturday, 8 July 2017

सितारों के धागे

दुआ को जब भी अपने हाथ उठाए आसमाँ मुँह चिढ़ा के हँसा
तेरी हथेलियों के धागों में तकदीर का इक सितारा भी न फँसा

-तुषारापात

Friday, 30 June 2017

वसुधंराम्बर

"आप दोनों की सारी बातें मैंने सुनी...ठीक है मैं आपकी तलाक की अर्जी ले लेता हूँ पर आप दोनों को एक महीने का समय देता हूँ...एक बार फिर अच्छे से सोच लीजियेगा.. ओके.. मिस्टर अम्बर.. एंड.. मिसेज वसुंधरा...'गुप्ता' ." जज ने वसुंधरा के नाम के साथ गुप्ता पे ज़ोर देते हुए कहा

अम्बर ने धीरे से सहमति में सर हिलाया पर वसुंधरा ने ये सुनते ही तपाक से कहा "लेकिन सर..हमारे बीच अब सुलह की कोई सूरत नहीं है..तो..तो ये एक महीने का टाइम खराब करने से क्या फायदा..इस शख्स ने कभी मेरा ख्याल नहीं रखा..और वैसे भी हम दोनों पिछले सात महीनों से अलग अलग ही रह रहें हैं तो फिर अब ये एक महीना और क्यों?"

"मिसेज गुप्ता..आप यहाँ अदालत में कैसे आती हैं..आई मीन..टैक्सी से..बस से या स्कूटी से..?"

वसुंधरा इस अजीब से प्रश्न से थोड़ा सा हैरान हुई पर जज के पूछने पे जवाब तो देना ही था तो बोली "जी पहले टैक्सी से आती थी पर अब अपनी कार से आती हूँ.."

"खुद ड्राइव करके?"जज ने पूछा

"नहीं...अभी कुछ दिन पहले ही ड्राइवर रखा है..वो ही चलाता है" वसुंधरा ने कहा

"हम्म..मतलब जब आप दोनों साथ थे..और कहीं जाते थे..तो मिस्टर अम्बर ड्राइव करते थे.." जज ने उससे पूछा

"ह.हाँ." वसुंधरा ने अनमने मन से उत्तर दिया

जज ने एक नज़र अम्बर पर डाली और फिर वसुंधरा से मुख़ातिब हुआ "मतलब आपने कभी कार चलाना सीखने की जरूरत नहीं समझी.. खैर वो बात जाने देते हैं..एक बात बताइए ये बोतल में क्या है?" जज ने उसके हाथ मे पकड़ी बोतल की ओर इशारा करते हुए पूछा

"मुझे समझ नहीं आ रहा कि इन सवालों का मेरे तलाक़ से क्या लेना देना है.." वसुंधरा का सब्र टूट गया और उसने खीज के साथ कहा

"वो क्या है मिसेज 'गुप्ता' मैं यहाँ सुलह कराते कराते बोर हो जाता हूँ..तो सोचा थोड़ा मनोरंजन कर लूँ" जज ने सपाट स्वर में उससे कहा तो वसुंधरा ने उसके व्यंग्य को समझते हुए जल्दी से उत्तर दिया "बॉटल में.प.पानी है..सर..मुझे प्यास ज्यादा लगती है..गर्मी भी बहुत.."

जज ने उसकी बात बीच में ही काटते हुए कहा..कभी ऐसा हुआ है कि आप कार से कहीं जा रहीं हों..और चलते चलते..मतलब कार ड्राइवर चला रहा हो आप कार में बैठी हों और आपने पानी पिया हो..?"

"हाँ..कई बार हुआ है..इवन आज भी यहाँ आते हुए..काफी सारा पानी मेरे ऊपर छलक भी.....गया था" वसुंधरा बताते बताते रौ में कह गई पर उसे लगा कि ये क्या बताने लगी तो आखिरी के दो शब्द उसने धीरे से कहे

जज उसे देखकर मुस्कुराया और अम्बर की ओर इशारा करते हुए बोला "मिसेज गुप्ता..आपकी सात साल की शादीशुदा लाइफ में कभी ऐसा हुआ कि ये..ड्राइव कर रहे हों और आपने पानी पिया हो..और पानी बोतल से छलक के आप पर गिरा हो..?"

वसुंधरा इस प्रश्न पे चुप रह गई ऐसा कभी नहीं हुआ था क्योंकि जब भी वो पानी पीती थी तो अम्बर कार की स्पीड उसके हिसाब से एडजस्ट कर लेता था,उससे कुछ बोलते नहीं बना तो जज ने आगे कहा "हम अक्सर बड़ी बड़ी चीजों को देखते हैं कि हमारा उसने ख्याल नहीं रखा..कम्प्लेंट करते हैं..पर छोटी छोटी ख्याल रखने वाली बातों को नज़रंदाज़ कर जाते हैं..ये एक महीना आप दोनों को ऐसी ही कुछ बातों को याद करने के लिए दिया गया है"

दोनों उठकर चले जाते हैं तो जज अपने सहयोगी से कहता है "धरा सर के ऊपर के आकाश को दूर देखती है क्योंकि अहम के कारण उठी गर्दन उसे क्षितिज नहीं देखने देती जहां अम्बर धरा पे झुका रहता है।"

-तुषारापात®

Wednesday, 28 June 2017

हाज़मोला

हाज़मोला: करोड़ों की लूट करने वाले का कुछ हज़ार का दान।

-तुषारापात®

बुद्धिजीवी

बुद्धिजीवी: जो सिगरेट पीते पीते बता देता है कि अगरबत्ती के धुएं से वायु प्रदूषण होता है।

-तुषारापात®

Sunday, 25 June 2017

ईद उल फ़ित्र

मायूसियों की बू पे चढ़ता नहीं अब उम्मीद का इत्र
अयूब के कुनबे से कहूँ कैसे मुबारक ईद-उल-फ़ित्र

-तुषारापात®

Tuesday, 20 June 2017

चश्मों के बाँध

देखकर गैर के काले मनकों में उसकी नथ का सफेद मोती
आँखों की उमड़ती नदी पे हमने चश्मों के काले बाँध रख लिए

-तुषारापात®

परिक्रमा

युक्ति भक्ति और शक्ति में
नहीं रहा द्वंद्व
कलियुग में कृतयुग की
कथा का संबंध?
शक्ति से भक्ति का
रच सकता जो प्रपंच
चाटुकारिता की युक्ति से
तोड़े वो सब बन्ध
आदर्शों के वचनों को
कहने वाला तू
एकाकी कर दिया जाएगा
आकाश की ओर
क्या ताकता?
वह पहले ही से
कथा वाचता
कर रमा-रमापति की परिक्रमा
उमा-नंदन प्रथम पूजन पाते हैं
पूरी पृथ्वी मापित करने वाले
कार्तिकेय श्रापित से रह जाते हैं।

-तुषारापात®

Monday, 12 June 2017

ऑफिसियल मेल


"कुछ कहना होता तो व्हाट्सएप्प नहीं एक मेल आता...कंपनी जॉब इंटरव्यू के रिजल्ट्स व्हाट्सएप्प पे नहीं बताती" उसका रूखा सा रिप्लाई आया

"सुमैरा..मुझे पता नहीं था कि तुम वहाँ की बॉस.." मैं अधूरा ही मैसेज भेज सका

"अब व्हाट्सएप्प मत करना.." उसने रिप्लाई किया और मुझे ब्लॉक कर दिया

अगले दिन अजीब सा ऑफिसियल मेल आया...रिजेक्टेड!.. रिजेक्टेड!... रिजेक्टेड!

मुझे सुमैरा को सात साल पहले कहे अपने शब्द याद आ गए "तलाक!..तलाक!..तलाक!..।"

-तुषारापात®

Monday, 5 June 2017

खुले खत का लिफाफा

नज़र की धार से
खुले ख़त का लिफाफा
गलत ही सही
काट तो दो कभी
सही के दो निशान
कब से यहाँ
नीले होने को तरसते हैं

#√√#तुषारापात®

Sunday, 21 May 2017

एयर कंडिशन्ड लड़का

चलते चलते कार का ए सी अचानक खराब हो गया,दोपहर का टाइम था तो धूप भी बहुत तेज थी,थोड़ी ही देर में विमल के सर से पसीना बहने लगा,वो बड़बड़ाने लगा "ये साले सर्विसिंग वाले भी...अच्छा खासा तैयार होके निकला था..पसीने ने सारे कपड़े खराब कर दिए"

सीतापुर में उसकी बिजिनेस मीटिंग है,अभी वो हाइवे पे पचीस तीस ही किलोमीटर चला था कि ए सी ने काम करना बंद कर दिया था वो पसीने से लथपथ था पर फिर भी कार के शीशे नीचे नहीं कर रहा था हाइवे पे उड़ती धूल और गाड़ियों के शोर से उसे बहुत कोफ्त होती थी।

"धत्त तेरे की..." अचानक लहराती कार को उसने किसी तरह संभाला  कार थोड़ी दूर जाकर ही सड़क के किनारे लग पाई,वो दरवाजा खोल के टायर पे लात मारता है कार का अगला टायर पंचर था गुस्से से तमतमाया वो इधर उधर देखता है कि पता करे पंचर वाले कि दुकान कहाँ है हालांकि उसकी कार में स्टेपनी है पर उसे टायर बदलने का काम बहुत ही खराब लगता है और इस समय तो वो अपने साफ कपड़े बिल्कुल ही खराब नहीं करना चाहता था,वो देखता है जिधर वो जा रहा था उसी ओर थोड़ी दूर पे खप्पर पड़ी कोई चाय वाय की दुकान है,वो उस ओर भारी कदमों से चल देता है तेज धूप में चलते हुए जब वो दुकान पे पहुँचता है तो पसीने से पूरा भीगा होता है प्यास से उसका गला सूखने लगा था वो दुकान के पास पड़े सायकिल के एक टायर को देखते हुए उस चायवाले से पूछता है "क्यों..यहाँ आसपास कोई पंचर बनाने वाला है क्या..कार का पंचर..."

"इहाँ तो नाई..पर 'सर' इहाँ सेरे तकरीबन पन्द्रा किलोमीटर आगे पेटोल पंप परिहां  हई" चाय वाले का जवाब सुनकर विमल का दिमाग और खराब हो गया उसने कहा "अच्छा पानी है?" उसके कहते ही चायवाले के यहाँ खड़ा एक 10-11 साल का लड़का झट से दौड़ के पास लगे हैण्डपम्प से पानी भरके के प्लास्टिक का मग उसके सामने रख देता है

"अरे बोतल वाला है?" विमल मग को दूर खिसकाते हुए चाय वाले से खीजते हुए पूछता है चायवाला उस लड़के को डाँटता है "तुम ससुरे के एक तउ इहाँ बेफालतू महियां खड़े राहत हो अऊर ग्राहकी कहियां अलग परेशान करत हउ" कहकर वो प्लास्टिक के नीले बक्से से बर्फ में दबी पानी की ब्रांडेड बोतल विमल के हाथ मे देता है विमल जल्दी से गटागट करके आधी बोतल खींच के पी जाता है और उस लड़के से कहता है "जरा चलके मेरे साथ टायर बदलवा देगा..पैसे दूँगा" लड़का तुरंत तैयार हो जाता है और दुकान पे अपने साथ लुढ़का के लाये उस सायकिल के टायर को उठा के कहता है "चलऊ"

विमल एक और पानी की बोतल खरीदता है और दोनों बोतल पकड़े हुए विमल और वो लड़का सायकिल का टायर पकड़े पकड़े कार की ओर चलने लगते हैं,कार के पास पहुँच के विमल हाथ मे पकड़ी पानी की बोतलें कार की सीट पे रख,डिग्गी खोल के स्टेपनी और जैक वगैरह निकाल के बाहर रखता है और अनमने मन से पंचर टायर के नट खोलना शुरू कर देता है बीच बीच में वो अपनी पैंट भी बचाने की कोशिश करता जाता है पास खड़ा लड़का उसे देखता है तो एक झटके में अपनी बुशर्ट उतार के सायकिल के टायर पे डालता है और नट खोलने वाले पाने की रॉड पे खड़े हो होकर नट खोलने लगता है किसी तरह दोनों मिलके टायर बदल लेते हैं,जैक वगैरह कार की पिछली सीट पे फेंकने के बाद पसीने से लथपथ विमल पानी की बोतल उठाता है और लड़के की तरफ देखता है लड़का भी पसीने से भीगा हुआ था वो बड़े मजे से अपनी बुशर्ट से अपना बदन पोछ रहा होता है विमल उससे पूछता है "पानी लोगे" और उसकी ओर पूरी भरी वाली बोतल और बीस का नोट बढ़ाता है

लड़का पसीने से भीगी शर्ट पहन चुका होता है उसे प्यास लगी थी वो बोतल और नोट झट से पकड़ता है नोट अपनी निक्कर में डाल वो बोतल झुका कर अपने हाथ से चुल्लु बना पानी पीना शुरू करता है और तुरंत ही रुक जाता है "उरे...यउ पानी तो बिल्कुलई बेस्वाद हई..यउ तउ अब अपने कहियां ए सी बनहिए" यह कहकर वो बोतल में बचा पानी अपने सर के ऊपर डाल लेता है और खाली बोतल से साइकिल के टायर को लुढ़काते हुए पानी से भीगी शर्ट और भीगे बाल उड़ाता चाय की दुकान की ओर दौड़ जाता है

विमल कुछ देर केलिए उसे बस देखता ही रह जाता है,पानी पीता है और अपनी शर्ट का ऊपरवाला एक बटन खोलता है,दोनों आस्तीनों के बटन खोल के ऊपर मोड़कर,कार में बैठता है और कार स्टार्ट कर, आगे बढ़ा देता है,थोड़ा सा चलने पर वो लड़के के पास पहुँच जाता है,लड़का लुढ़कते टायर पर बोतल मार के चहकते हुए हॉर्न की आवाज की नकल करता है "पों..पो.."

विमल उसे देख के मुस्कुराता है उसकी कार उस एयर कंडिशन्ड लड़के के एक चक्रीय वाहन को  क्रॉस करके आगे बढ़ने लगती है इस बार उसकी कार के शीशे उतरे हुए हैं और पसीने से भीगे होने के कारण बाहर की गरम हवा उसे ठंडक पहुँचा रही है।

-तुषारापात®