Saturday, 19 August 2017

पैबंद

मन्नतों के रॉकेटों से किए हमने उसकी झोली में सुराख़ इतने
कि ख़ुदा को अपने आसमाँ पे सितारों के पैबंद लगाने पड़ गए

-तुषारापात®

Friday, 4 August 2017

इंद्रधनुष

पथ से मुझे रपटा कर
हो रहा तू अति प्रसन्न!
देवताओं के राजा!
अपना धनुष दिखा कर
मत कर शक्ति प्रदर्शन!

वर्षा वृष्टि द्वारा
कर तू मार्ग जलमगन
नौका का निर्माण कर
करूँगा मैं पथगमन

मेघों की गर्जना से
काँपते नहीं 'सिंह' के पैर
देवेंद्र होकर रखता तू
एक मानव मात्र से बैर

स्वर्गों की नहीं
चाह मुझे न कामना
मेरा लक्ष्य तुझे
तेरा राज्य लाँघना

मैंने बैर लिया है
संसार के स्वामी से
मेरे अंतर की पीड़ा
न पढ़ने वाले अंतरयामी से

मैं एक हूँ और वो है एक
फिर क्यों मैं तुच्छ वो है श्रेष्ठ
पिता है वो तो मैं हूँ उसीका पुत्र
तेरा क्या तू है मात्र सेवक ज्येष्ठ

मत बन अवरोधक
मत भूल अरे दुष्ट!
मेरे यज्ञ की भिक्षा से
होता आया तू पुष्ट!

दे दिया था दान तुझे
पहले ही अपना आसन
बैठता गर्वित हो तू जिसपर
कहलाता वो आज भी 'सिंहासन'

बंद कर अपना यह जलाघात
मत दिखा मुझे यह इंद्रधनुष
खंडित होगा निमिष मात्र में
प्रचंड 'तुषारापात' है यह मनुष!
प्रचंड 'तुषारापात' है यह मनुष!

-तुषारापात®

Monday, 31 July 2017

पाउडर

आसमाँ की पीठ पे
फेरो जो हाथ
तो दरदारती हैं
सितारों की पट्टियाँ

रात को चमकते हैं
गुनाह सूरज के
धूप से हुईं हैं ये
आसमाँ को घमौरियाँ

चाँद के डब्बे से
कोई पाउडर लगाता है
आसमाँ की पीठ पे
छाईं हैं सुफेद बदलियाँ।

-तुषारापात®

घमौरियाँ

सितारे
धूप से पैदा हुईं
घमौरियाँ हैं
आसमाँ की पीठ पे
पाउडर लगा गया कोई
बहुत से सफेद बादल आज छाए हैं।

-तुषारापात®

Saturday, 29 July 2017

चराग़

यूँ पलकें झपका के,कहीं,किसी का रस्ता तकते हैं?
तुम्हें देखने की मुराद में,हम आँखों के चराग़ मलते हैं

-तुषारापात®

Thursday, 27 July 2017

मेरा कुछ सामान (मेल वर्जन)

मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास पड़ा है
जेठ की तपती दोपहरियां हैं कुछ
पानी की बोतलों पे चिपके होंठ पड़े हैं
वो निशान मिटा दो मेरा वो सामान लौटा दो

बहारें हैं कुछ,देखो,हैं न
पेड़ों के नीचे कुचले वो पीले फूल पड़े हैं
मेहंदी से पहले जिनसे हथेलियां पीली की थीं
वो रंग छुटा दो,मेरा वो सामान लौटा दो

एक सौ सत्रह बरसातें,एक तुम्हारी तौलिये पे बिंदी
सौंधी सौंधी ज़ुल्फ़ की खुशबू,नींबू वाली चाय की चुस्की
जलते स्टोव की आँच में मेरे कुछ अरमान पके थे
वो अरमान दबा दो,मेरा वो सामान लौटा दो

एक अकेली चादर में जब आधे आधे जाग रहे थे
आँखें मूँदें,लब चूमें,आधी आधी बाहों में थे पूरे पूरे
सर्दियों की उस रात जो पी लीं थीं तुमने
मेरी वो साँसे कम पड़ गईं हैं
वो भिजवा दो,मेरा वो सामान लौटा दो

एक इज़ाजत दी थी तुमको
वो वापस भिजवा दो
या मुझको भी साथ दफ़ना लो।

-तुषारापात®

Tuesday, 25 July 2017

आलू टमाटर

टमाटर सौ के पार हुआ पर आलू
रुपैये बीस में दो किलो आते क्यों हैं?

उनके टमाटर जैसे रुख़सारों पर
ज़माने भर के आलूओं की आँखें जो हैं।

-तुषारापात®

Monday, 24 July 2017

बिरहम्मा

दिल में लहू की बगावत के जैसे
तुम मुझमें हो मेरी ख़िलाफ़त के जैसे

पैरों में बाँध के जरूरत के घुँघरू
ज़िंदगी नाचती है तवायफ़ के जैसे

वो बुदबुदाता है पाँचों वक्त आयतें
ख़ुदा के कानों में शिकायत के जैसे

लगके गले पीठ ख़ंजर से थपथपा के
मोहब्बत दिखाता है अदावत के जैसे

चढ़ती जवानी का है ये मुआमला
दबे पाँव उतरती शराफत के जैसे

दफ़्न है मुमताज़ शाहे जहाँ के सीने में
दिल है ताजमहल की बनावट के जैसे

के काफ़िरों ने ईज़ाद करके इक नया ख़ुदा
मोमिनों से किया हिसाब क़यामत के जैसे

तू शायिर है 'तुषार' बिरहम्मा तो नहीं
लिखेगा ख़ाक उसकी लिखावट के जैसे

#तुषारापात®