Thursday, 22 September 2016

वर्षगाँठ

तुमने मुझे छुआ
मैं कवि हुआ
तुम्हारी मेरी कहानी ने आकार लिया
संसार ने घोषित मुझे कथाकार किया
तुम्हारा मुझमें विन्यास हुआ
मुझसे उत्पन्न उपन्यास हुआ
आँखों का त्राटक हुआ
मुझसे पहला नाटक हुआ
तुम्हारे संग चित्र खिंचा
मैंने अनोखा रेखाचित्र रचा
तुम्हारे मेरे जीवन की झाँकियाँ
ही हैं मेरी समस्त एकांकियाँ
तुम आच्छादित सुगंध
मेरा पहला अंतिम निबंध
तुम्हारे खुले मुंदे शुष्क नम नयन
मेरे हास्य व्यंग्य कटाक्ष प्रहसन
दर्पण की तरह प्रतिबिम्बित करतीं तुम सदैव सत्य सूचना
मेरी समीक्षा रिपोर्ताज साक्षात्कार हो तुम मेरी आलोचना
तुम्हारे साथ व्यतीत जीवन अधिक पर शब्द हैं अल्प
यात्रा वृतांत की डायरी पर अंकित सब सत्य गल्प
तुम्हारे साथ बंधा था आज मेरा जीवन मरण
पिछले जन्मों के पुण्यों का हुआ मुझसे संस्मरण
तुमसे है मेरा साहित्य मेरे लेखन की हर विधा
तुम्हारे बिना ये तुषारापात मात्र एक लघुकथा
मेरे जीवन की बस इतनी आख्या
मैं सन्दर्भ तुम्हारा तुम मेरी व्याख्या
अर्धांगिनी!सात जन्मों की प्रिय संगिनी
तुम्हीं आत्मकथा मेरी तुम्हीं हो जीवनी

-तुषारापात®™