Wednesday, 22 July 2015

रात के शहंशाह

दिन के खण्डहर से
शाम,छुड़ा लाइ है रात का महल
नींद के मुजरे पे,ख्वाब लुटाए जायेंगे
कई एक रात के शहंशाह
सुबह तक फिर खाली हाथ
अपने खण्डहर के चौकीदार हो जायँगे

-तुषारापात®™

इलाज़

आज भी खाना खाने के बाद कमल के पेट में जोरों का दर्द होने लगा तो वो अपनी पत्नी सुंदरी से बोला "सुनती हो...वर्मा डॉक्टर बिल्कुलहि बेकार हई .....बस नीली पीली गोली दै के पइसा अइन्ठत है सालो.."

सुंदरी उसका रोज रोज का दुखड़ा सुन सुनकर ऊब चुकी थी और अपने पति की चिंता में परेशान भी थी, खीज के बोली " कित्ती बार तो कहो हई तुमसे....नखलऊ जाइके बड़े डाक्टर कहियां दिखाई लेव....इहाँ मल्लावां महियाँ का धरो हई...लेकिन नाई...पेट पकड़े रहियो...पर जइहउ नाहि"

"कलहि निकल जइबो...राजेश भइयाक साथ उनकी मोट साइकल सेरे" कमल ने आखिरकार मन बना ही लिया था, अगले दिन वो और राजेश लखनऊ के मशहूर और बड़े डॉक्टर मेहरोत्रा के नर्सिंग होम में पहुँचते हैं
" भइया राजेश..इहाँ तो जइसे पंजीरी बट रही होय..इत्ती भीड़ हई" कमल ने वहाँ जमा भीड़ देखते हुए कहा

"अरे बहुत बड़ो डाक्टर हई..चार पाँच घण्टा महियां अपनो नम्बर अईहई" राजेश ने कहा
करीबन पाँच घण्टे के बाद वो लोग डॉक्टर मेहरोत्रा के चेम्बर में बैठे थे

"डाक्टर साहब...पेट बहुत पिरावत राहत हई..खाना खायेक बाद तो बर्दाश्त नाइ होत" जितनी देर में कमल ने अपना कष्ट डॉक्टर को बताया उससे पहले ही डॉक्टर मेहरोत्रा पूरा प्रेस्क्रिबशन लिख चुके थे और बोले " देखिये आपकी समस्या गंभीर लग रही है.. मैंने कुछ खून और पेट की जाँचे लिखी हैं वो आज ही करवा लीजिये...और हाँ ये एक कैप्सूल अभी ही खा लीजिये..कल रिपोर्ट लेकर फिर दिखाइए मुझे"

"पर डाक्टर साहब..हम तो बाहिर केरे हैं...कमल की बात अधूरी रह गई एक डॉक्टर का हेल्पर लड़का उन्हें उठने को बोला की वो सब समझाता है वो लोग अब उसके साथ चलें

" देखिये..आप अपना खून का सैंपल यहाँ दे दीजिये..और पूरे पेट का अल्ट्रासाउंड और सीने का एक्स-रे होना है..उसकी रसीद कटवा लीजिये
आपका टोटल पैसा हुआ 9500 वो पहले जमा करा दीजिये" डॉक्टर के सहायक लड़के ने राजेश से कहा और वापस चला गया

" राजेश भइया..रुपिया पॉंच सई तो फीस महियां लइ लीन और अब 9500 और... का जरुरी है ई जाँचे कराना" कमल ने कहा

" अब डाक्टर कहिन हई तो..जरुरी ही हुईहि." राजेश और कहता भी क्या
खैर साहब डॉक्टर की वाणी ब्रह्म वाणी मान के वो पैसा जमा करा देते हैं डॉक्टर का दिया कैप्सूल खा कर और खून का सैंपल तथा अन्य जाँचे आदि कराकर परसों का अपॉइंटमेंट लेकर वापसी की राह पकड़ते हैं

एक दिन के बाद वो रिपोर्ट लेकर डॉक्टर मेहरोत्रा से फिर मिलते हैं, डॉक्टर सारी रिपोर्ट देखने के बाद बोलते हैं" स्थिति बहुत गंभीर दिख रही है, आपके पेट में गाँठ जैसी दिख रही है आप तुरंत एडमिट हो जाइये फिर आगे देखते हैं क्या इलाज सही रहेगा"

भगवान् के अवतार ने भगवान् के पास जाने का डर दिखा के उन्हें अपने यहाँ एडमिट करवा लिया,उसके बाद सात दिन तक अपने अस्पताल में रखा सी टी स्कैन, एम आर आई आदि जितनी जाँचे संभव थी करवा ली,हर दिन के रूम,नर्सिंग,डॉक्टर विजिट दूसरे डॉक्टर के विजिट के नाम पे 95000 रुपैये डकारकर जब देखा की कमल अब और नहीं दे पायेगा तब एक दिन राजेश से बोले" देखिये मुझे शक है कि आपके दोस्त को पेट का कैंसर है..जिसका सबसे अच्छा इलाज यहाँ पी जी आई में होता है..मैं कमल को वहाँ रेफर कर रहा हूँ आप आज ही इसे वहाँ ले जाकर दिखाइए"
राजेश ये बात सुनकर घबरा गया उसने कमल को बताया कमल की तकलीफ भी मेहरोत्रा के यहाँ एडमिट होने के बाद से और बढ़ गई थी तो मरता क्या न करता,तीन घंटे बाद पी जी आई के दरबार में वो दोनों हाजिरी लगाये थे नंबर आने पे डॉक्टर ने बोला " हम इन्हें एडमिट कर ले रहे हैं..पेट का ऑपरेशन करना पड़ेगा....गाँठ निकालकर बायप्सी के लिए भेजेंगे..अगर उसमे कैंसर आया तो आगे और इलाज चलेगा..और अगर नहीं ..तो आप पूरी तरह फिट हो जायेंगे"

"डाक्टर साहब..पइसा कित्तो.." कमल ने बहुत धीमी आवाज में पूछा

"आप ये परचा लेकर उस कॉउंटर न 13 पे चले जाइये वो सारा हिसाब बता देंगे" डॉक्टर ने कहा और चिल्लाया" नेक्स्ट"

राजेश और कमल कॉउंटर न. 13 से पैसा पूछ कर बुझे मन से हॉल में आकर बैठ गए

"लगत हई..राजेश भइया..जमीन बेचना पड़िहई..अब और सवा लाख रुपिया कहाँ सेरे अयिहई" कमल ने आँख के आये आंसू पोछते हुए कहा

जमीन बिक गई,ऑपरेशन हो गया पता चलता है की कमल को कैंसर नहीं है खाने में मिर्ची और तेल मसाला खाने से उसे पेट दर्द होता था और यहाँ के डॉक्टर ने जब बायप्सी से वापस आई उस गाँठ को दिखाते हुए उन्हें उसके बारे में बताया तो कमल और राजेश के होश उड़ गए और उन्हें बहुत ज्यादा गुस्सा भी आया

"नमस्का..डाक्टर साहब...आप केरी एक अमानत रहाय हमरे पास..सोचो लौटावत चलीं.." डॉक्टर मेहरोत्रा के चेम्बर में जबरदस्ती घुसते हुए कमल ने डॉक्टर मेहरोत्रा से चिल्ला के कहा

" डाक्टर साहब..ई हमरे पेट केरी गाँठ हई..जो हमका सवा दुइ लाख केरी पड़ी हई..आप कहियाँ हमरी तरफ सेरे गिफ्ट है " कहकर कमल ने बायप्सी की थैली रख दी और वापस चला आया

डॉक्टर मेहरोत्रा बहुत देर तक अपनी मेज पे रखे बायप्सी की थैली में बंद उस कैप्सूल को देखते रहे जो उन्होंने कमल को पहले दिन खाने को दिया था।

'मेडिकल साइंस ने जितनी अधिक उंचाईयाँ पाई है ,कुछ डॉक्टर उतना ही नीचे गिरते गए हैं'

-तुषारापात®™

हर्फ़

दो 'हर्फ़' जरा साथ साथ क्या थे
लोगों ने सैकड़ों 'लफ्ज़' बना दिये

हर्फ़=अक्षर
लफ्ज़= शब्द (यहाँ बातें या अफवाहों के सन्दर्भ में प्रयोग हुआ है)
-तुषारापात®™