Monday, 7 September 2015

रौशनी की दुकान

दिख न जाये दिन में उनके ऐब
आँख पे हमारी,आस्था की पट्टी लपेटतें हैं
रात में लगाते हैं रौशनी की दुकान
सुना है वो सूरज की फ़ोटू बेचते हैं
समझ नहीं आता क्या करूँ
रोऊँ कि दिल खोल के हँसू
दीपक की लौ पे नाचने वाले पतंगे
अँधेरा मिटाने की बात करते हैं
-तुषारापात®™