Sunday, 20 March 2016

जन गण मन

कल कुछ पुराने दोस्तों के साथ यहाँ के एक मशहूर लॉउन्ज में भारत पाकिस्तान टी 20 मैच देखने का प्रोग्राम बना हम लोगों को थोड़ी देर हो गई थी पर कोलकाता में बारिश होने के कारण मैच शुरू नहीं हुआ था इसलिये देर से पहुँचने पर भी मैच की एक भी एक्टिविटी हमने मिस नहीं की

लॉउन्ज के अंदर गया तो देखा कि न जाने कितने टीवी और प्रोजेक्टर स्क्रीन्स लगे हुए हैं और उनपे एशिया कप के भारत पाकिस्तान मुकाबले की हाइलाइट्स चल रही हैं कमेंट्री की आवाज फुल वाल्यूम पे थी लॉउन्ज अपने आप में एक स्टेडियम बना हुआ था जबरदस्त भीड़ थी पर हमारी बुकिंग थी तो हमें अपनी जगह मिल गई थी

मैच स्टार्ट होने से पहले के घटनाक्रम पे बाद में आऊँगा तो मैच शुरू होता है धोनी टॉस जीतते हैं पहले फील्डिंग का चुनाव करते हैं तो पाकिस्तान की बैटिंग शुरू होती है और पहली बॉल से लॉउन्ज में जो शोर शुरू हुआ वो मैच की आखिरी गेंद तक बढ़ता ही गया पाकिस्तान के एक एक विकेट गिरने पे तालियों और सीटियों की आवाज आपके कान को विकलांग बना सकती थी अश्विन की घूमती गेंदों पे यहाँ लॉउन्ज के लोग झूम उठते थे किसी तरह पाकिस्तान ने 118 रन बनाये और भारत को 119 का टारगेट दिया

और जब भारत की बल्लेबाजी शुरू हुई तब तक लॉउन्ज पूरा पैक हो चूका था विराट ने अपने नाम को चरितार्थ करते हुए भारत को जीत दिलाई उनकी एक एक शॉट इतनी परफेक्ट थी इतना सधा हुआ हाथ जैसे कोई बेहतरिन कारीगर चिकन की कढ़ाई कर रहा हो और उनका अपने पचासे पे सचिन तेंदुलकर को प्रणाम करना दिल को छु गया और ये सन्देश दे गया कि आप चाहे जितने सफल हों शिखर पे हों अपने से बड़ों का सम्मान नहीं छोड़ना चाहिए हमेशा की तरह धोनी के बल्ले से जीत का रन निकला और क्रिकेट के भगवान ने तिरंगा लेकर फहराना शुरू किया पर उनके बाजू में खड़े वृद्ध लेकिन युवाओं से भी अधिक सक्रीय हम सबके प्रिय अभिनेता अमिताभ बच्चन जी को जोश में तिरंगा फहराते देख मन गर्व से भर उठा दाँत पीस पीस कर जिस तरह उन्होंने अपनी खुशी जाहिर की वो टीम इंडिया को मैच की जीत पे मिला सबसे बड़ा तोहफा था

एक बहुत अच्छा और अनोखा अनुभव रहा ये मेरे लिए ऐसा लगा मैं भी स्टेडियम में ही हूँ खैर अब आते हैं उस बात पे जिसके लिए इतनी लंबी कहानी कही तो कल जब मैच शुरू होने जा रहा था तो आपको पता ही है दोनों देशों के राष्ट्रगान गाये जाते हैं पहले पाकिस्तान का राष्ट्रगान गया गया स्टेडियम में सन्नाटा हो चूका था और अब सदी के महानायक द्वारा अपना राष्ट्रगान गाया जाना था जैसे ही धुन बजी मैं अपनी सीट से खड़ा हो गया मेरे साथ मेरे सारे दोस्त खड़े हो गए लॉउन्ज का स्टाफ और लॉउन्ज में आये ज्यादातर लोग खड़े हो गए वहाँ सिर्फ अमिताभ बच्चन की आवाज सुनाई दे रही थी और राष्ट्रगान की एक एक पंक्ति एक एक रोम में जोश और गर्व भर रही थी उस समय की अनुभूति मैं बयाँ नहीं कर सकता

राष्ट्रगान खत्म होता है और फिर से हो हल्ला शुरू हो जाता है राष्ट्रगान के दौरान जो लोग खड़े नहीं हुए थे वे मोटी खाल के अधेड़ उम्र के पढ़े लिखे लोग थे जो अपने सोफे पे पसरे रहे और हम लोगों को देखकर खींसे निपोरते रहे उनके अलावा लॉउन्ज में ज्यादातर युवा ही थे हाँ वही युवा पीढ़ी जिसपे आरोप लगता रहता है वो नशे में डूबी नालायक नश्ल है वही लोग कल राष्ट्रगान के समय सबसे पहले खड़े हुए और उनसे एक पीढ़ी पहले के लोग बैठे दाँत दिखाते रहे उन्हें आखिर में शर्म जरूर आई होगी जब उन्होंने इतनी उम्र होने के बावजूद अमिताभ बच्चन को एक बच्चे की तरह जोश में तिरंगा फहराते देखा होगा

नई पीढ़ी बिंदास है बेबाक है बेफिक्र है पर जिम्मेदार है उन्हें कोसना छोड़ कर और अपने प्रवचनो के बजाय अपने आचरण से उन्हें दिशा निर्देश दें तभी कोई बात बनेगी वरना इंडिया इंडिया का नारा लगाते सब दिखेंगे पर इंडिया बनाता कोई नहीं दिखेगा ।

वैसे आपमें से कौन कौन कल टीवी पे राष्ट्रगान सुनकर खड़ा हुआ था ? उत्तर मुझे नहीं खुद को दीजियेगा ।

-तुषारापात®™