Monday, 28 November 2016

समय सारणी

"छी.. कितना गन्दा है...कभी साफ भी कर लिया करो..तुम्हारे रूम में कोई एक चीज है जो अपनी जगह पे हो...ये क्या है... यक.. सिगरेट के इतने सारे फिल्टर ग्लास में बची हुई चाय में तैर रहे हैं..." सारणी को उसके रूम में आए दो मिनट बीते थे और वो चार बातों पे उसकी क्लास ले चुकी थी

"मैडम...बैचलर्स के रूम ऐसे ही होते हैं...जब हमारी कोई गर्लफ्रेंड न हो तो लड़कियों के पीछे पीछे भागने में और अगर हो जाए तो उसे घुमाने शॉपिंग कराने में ही सारा टाइम निकल जाता है...अब लड़के लड़की सेट करें या रूम" समय ने उसकी कमर पे चुटकी काटने की कोशिश की पर वो एक तरफ हट गई

"तो क्या...हम लड़कियाँ भी तो उतने टाइम बाहर रहती हैं..फिर भी कॉलेज और बॉयफ्रेंड दोनों को मैनेज करने के साथ रूम भी सेट रखती हैं" कहकर सारणी ने सिगरेट फिल्टर्स को बाहर फेंका और ग्लास को धो के रख दिया उसके बाद बेड पे पड़े उसके कपड़े तह करके अलमारी में रखे इधर उधर पड़े न्यूज पेपर्स समेट दिए और कमरे को जितना भी सुधारा जा सकता था उतना सुधार दिया

"लड़कों को और भी कई टंटे होते हैं जो सेटल करने होते हैं..कोई मुंहबोली बहन को छेड़ रहा हो तो उसे अच्छे से समझाना या आएदिन किसी न किसी भाई का दिल टूटता रहता है तो हमें उसके लिए बीयर की बोतलों का काँधा भी अरेंज करना होता है..और पूरी पूरी रात बैठ कर साले की बकवास से भरी पूरी प्रेम कहानी बार बार सुननी होती है...तुम क्या जानो तुम लड़कियों ने हमारा जीवन कितना अस्त व्यस्त कर रखा है...लेकिन फिर भी चूँ तक नहीं करते...और मेरे केस में तो तुमने वो बात तो सुनी ही होगी कि समय बड़ा बलवान होता है" समय ने डायलॉग मारा और सिगरेट मुँह से लगाकर सुलगाने को माचिस ढूंढने लगा

सारणी अपने होंठ उसके होंठों के पास ले आई समय ने सोचा कि शायद आज उसकी किस्मत खुल गई है और उसने अपने होंठ खोल दिए सिगरेट नीचे गिर गई और सारणी ने झट से सिगरेट उठाकर तोड़ के फेंक दी और उससे दूर होते हुए बोली "समय बलवान होता है पर अगर सारणी से बंधा न हो तो इधर उधर यूँ ही बेकार में खर्च हो जाता है"

समय ने उसका हाथ पकड़कर उसे अपने पास बैठा लिया और धीरे से उसके नजदीक जाकर बोला "रूम में सफाई के अलावा कुछ और..काम..भी किये जा सकते हैं" सारणी ने उसे जोर का धक्का देते हुए कहा "हाँ रूम में कुछ खाने को बनाया जा सकता है"

"लग रहा है मैं अपनी गर्लफ़्रेंड को नहीं...माँ को ले आया हूँ.... बनाओगी क्या..सिर्फ मैगी और चाय बनाने का जुगाड़ है अपने पास" उसने एक कोने में पड़े मैगी के पैकेट की ओर इशारा करते हुए कहा सारणी ने दो पैकेट उठाए और एकमुखी चूल्हे पर जो सिलेंडर से ही जुड़ा रहता है उसपर पानी गर्म होने को पैन चढ़ा दिया

"मैगी ही खाना था तो बाहर ही खा लेते...रूम में आकर कोई गर्लफ्रेंड खाना बनाती है क्या" समय ने बनावटी गुस्से वाली शक्ल बनाते हुए कहा

"खाना खाना बनाएंगे तभी तो हमारी 'समय-सारणी' बन पायेगी" सारणी ने उसे बाँहों में लेते हुए कहा

मैगी बनने में दो मिनट लगते हैं इन दो मिनट में समय सारणीबद्ध हो रहा था।

#समय_सारणी
#तुषारापात®™