Sunday, 19 July 2015

रफू

उधेड़ देता है जमाना जब जज्बात मेरे
मैं कलम से अपने हालात रफू कर लेता हूँ

-तुषारपात®™

कथा

"राम राम ! सुनीता दीदी कैसी हैं आप?"
"अरे सुदीपा ! राम राम मैं बहुत अच्छी हूँ तुम कैसी हो? ये बता तुम पिछले परिवार मिलन में आई थी क्या ? मैं नहीं आ पाई थी मेरी किटी थी"
"हाँ दीदी आई थी और बहुत मजा आया था खूब् भजन हुआ था हम सब खूब नाचे थे, गुरूजी के साथ कई फोटो भी खिंचाई थी fb पे पोस्ट तो की थी आपने नही देखी?
"हाँ देख नहीं पायी,चलो लगता है गुरूजी ध्यान शुरू कराने वाले हैं जल्दी से अपनी जगह ले लेते हैं"
"अरे दीदी उधर आगे कहाँ जा रही हैं इधर पीछे बैठते हैं न आपसे कुछ बातें भी हो जाएँगी वैसे भी आगे तो सबकी सब जगह घेर लीं हैं पहले से"
"हाँ चल पीछे इधर दीवार के पास बैठते हैं कमर भी टिक जायेगी ,आगे तो सारी की सारी चापलूस पहले ही अपना आसन बिछा के उसपे अपना बैग और पानी की बोतल रख के अपना रिजर्वेशन कर देती है हमेशा का नाटक है ये इनका सब की सब मुई बहुत चालाक हैं"
"अरे दीदी थोड़ा धीरे धीरे फुसफुसा के बात करते हैं हम,सब ध्यान में बैठ गए हैं"
" अरे क्या बताऊँ मेरा तो मूड ऑफ हो जाता है इन सबों की मक्कारी देख के आगे आगे घुस के गुरूजी की बड़ी सगी बनती हैं दिखावा करने में सब बड़ी उस्ताद हैं"
" दिखावे से याद आया अब वो भैया नहीं दिखते परिवार मिलन में पहले तो बड़ा गुरु जी के आसपास रुआब से घूमते फिरते थे"
"हाँ समझ रही हूँ किसकी बात कर रही हो, वही न जो बिलकुल गुरु जी तरह धोती कुरता पहनने लगे थे अपने को बड़ा तीस मार खाँ समझते थे"
"आजकल गायब कहाँ हैं वो fb पे भी गुरूजी या आश्रम की कोई पोस्ट न तो शेयर करते हैं like भी नहीं करते "
"अरे गायब क्या सुनने में आया है की निकाल दिए गए हैं आश्रम की मेंबरशिप से"
"लेकिन वो तो हर कार्यक्रम में बड़े जोर से मेहनत करते दिखते थे वो भी टिंच धोती कुरता पहन के"
" अरे गुरूजी की तरह कपड़े पहनने से क्या उनके जितने ज्ञानी हो जायेंगे सुनने में आया है की वो चाहते थे की यहाँ लखनऊ में गुरु जी की तरह वो अपना प्रवचन किया करें मठाधीशी करना चाहते थे गुरूजी ने निकाल बहार किया"
"लेकिन दीदी गुरु जी को उनसे क्या खतरा हो सकता था वो तो परम ज्ञानी हैं हाँ वैसे उन भैया में भी ज्ञान तो बहुत है मैंने देखा है fb पे लिखते तो बहुत अच्छा हैं और बातें भी बहुत अच्छी अच्छी बताते हैं"
"अरे कहीं से टीपते होंगे आजकल copy paste करके सब ज्ञानी बने हुए हैं फेसबुक पे"
"कुछ दिन पहले कोई फ़िल्म की कहानी लिख रहे हैं ऐसी कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस की फ़ोटो भी डाली थी"
"अरे होगी कोई सी ग्रेड भोजपुरी पिक्चर ऐसी आलतू फालतू फिल्मों के लेखक ऐसे घटिया ही रहते हैं"
"पता नहीं दीदी दिखते तो कई जगह है अच्छा काम करते,कभी महिला दिवस कभी रामकथा कभी कोई किताब लिखते और रेडियो पे भी न जाने क्या क्या किया करते हैं यहाँ अपने आश्रम में भी काम तो बहुत करते थे अब राम जाने अंदर की क्या बात थी"
" अरे छोड़ गुरु जी के साथ पुण्य आत्माएं ही टिक पाती है अभी उनमे उतनी purity नहीं रही होगी जितनी हम सब में हैं"
" पर दीदी गुरूजी तो अंतर्यामी हैं सबको शुद्ध कर देते हैं वो गुरूजी के इतने पास रहे उनकी शुद्धि क्यूँ नहीं हुई फिर"
"अरे सुदीपा तू बहुत भोली है छोड़ ये सब हम क्यों अपना मुंह गन्दा करें ऐसे लोगों के बारे में बात करके"
"दीदी लगता है गुरु जी ध्यान से वापस ला रहे हैं सबको अब एक एक करके सबसे उनका आज के ध्यान का अनुभव पूछेंगे"
"चल जल्दी से अपनी अपनी आँखे बंद करके चुप करके सीधे बैठ जा जब वो पूछेंगे तभी आँखे खोलना और सुन अनुभव बताने के बाद गुरु जी के पास जब आशीर्वाद लेने जाऊँ तो फटाफट मेरी कई सारी फोटो खींच लेना "
"हाँ दीदी समझ गयी "
" राम राम ! माँ अब आप अपनी आँखे खोल लें और अपना अनुभव हमसे बाटें"
" अर..र कौन मैं गुरु जी"
"हाँ दीदी गुरूजी आपही से कह रहे हैं"
"गुरु जी श्री चरणों में मेरा सादर प्रणाम! गुरु जी आज ध्यान के उपरांत मुझे सब कुछ सफ़ेद सफ़ेद दिखा जैसे दूध का रंग होता हैं न वैसे कहीं कोई मैल नहीं बस सब कुछ उजला उजला धुला धुला और ...और..हाँ गुरु जी एक बहुत तेज पीली रौशनी मुझे दिखाई दी...मेरा तो मन ही नहीं कर रहा था वापस आने का ...लग रहा था बस आँखे बंद किये आनंद में और गहरे गहरे खो जाऊँ"
" बहुत अच्छे माँ ! आपने ध्यान के प्रथम स्तर की उच्च अवस्था को प्राप्त कर लिया है, ईश्वर की विशेष कृपा है आप पर,राम राम !"

-तुषारापात®™