Tuesday, 1 November 2016

खंजर/छुरी

"बताओ न..कैसी लग रही हूँ..लाल साड़ी में"

"कत्ल के बाद के खंजर जैसी"

"पर जनाब खंजर तो मेल होता है"

"ह्म्म्म..तो क़त्ल के बाद की छुरी जैसी"


#तुषारापात®™

बेवजह

"कभी बेवजह ही सही मिलने आ जाया करो"

"क्यों"

"मिलके जब जाते हो..लिखने की वजह बन जाते हो"
#तुषारापात