Sunday, 9 August 2015

अक्स

अक्स जिनका नजर आता था मुझमें
उन्हीं के लिए हम 'आइना' हो गए

-तुषारपात®™


प्रेम साधना

आप दिल्ली मेट्रो में सफ़र कर रहें हों
अपनी सीट पे बैठे बैठे कुछ गुनगुनाते हुए
आते जाते लोगों को देखते हुए अपने में गुम हों कि तभी आपके डिब्बे में आती हुई भीड़ में एक बहुत ही आकर्षक युवा महिला मेट्रो में दाखिल होती है सबकी लोहे सी निगाहें उनके चुम्बकत्व के दायरे में सिमट के रह जाती हैं पर ये क्या अचानक आपका चोर दिल बड़ी तेज़ी से धड़कने लगता है जब आप उसे देखते हैं की वो आपकी ओर ही देखे जा रही है और तेज़ी से आपकी तरफ आ रही है और डब्बे के सारे लोग उसे और आपको देखने लगते हैं एक रहस्मयी मुस्कान सबके चेहरे पे देख के आप थोड़ा आश्चर्य में होते हैं और थोड़े क्या बहुत ज्यादा गर्व में होते हैं और वो आपके बिलकुल नजदीक आकर बड़े प्यार से अपनी ज़ुल्फ़ें झटक के,मुस्कुरा के अपने गुलाबी होठों को थिरका के थोड़ा कड़क अंदाज़ में आपसे कहती है "excuse me you are on ladies seat"
और यूँ आपकी छोटी सी प्रेम साधना पे हो जाता है 'तुषारापात'!

-तुषारापात®™