Thursday, 15 December 2016

इकाईयों को हासिल नहीं मिलते

"आज दोपहर वो खुद ही आकर दे गया...सबको इनवाइट किया है...मिसेज खान विथ फॅमिली" ऑफिस से लौट के वो डाइनिंग टेबल पर रखे कार्ड को उठा के देख ही रही थी कि पीछे से उसकी माँ बोल उठीं

कहीं बहुत गहराई से उसकी आवाज निकली "हूँ..." उसने एक गहरी साँस ली पर छोड़ी बहुत आहिस्ता से,धीरे से पर्स टेबल पे रखा,बाल खोले और कुर्सी ऐसे खींची कि बिल्कुल भी आवाज न हो और खींच के उसपे हौले से बैठ गई,कार्ड अभी भी उसके हाथों में था "हासिल वेड्स...." आगे के नाम को उसने पढ़ा नहीं... तख़्त दान में देने वाले ये नहीं देखा करते कि उनके बाद उसपर कौन बैठा

"इक्कु...आज तेरा जन्मदिन है बेटा...और आज ही वो अपनी शादी का कार्ड दे गया....और शादी अपने जन्मदिन पर कर रहा है...ये सब क्या है...?" अम्मी ने चाय की प्याली उसके आगे रखते हुए कहा

"कुछ नहीं..." उसने कहा और आधी बात धीमे से बुदबुदाई "ये तोहफा है एक दूसरे को हमारे जन्मदिन का..." कहकर उसने चाय का एक घूँट भरा और निगलते ही कुछ ही दिन पुरानी हुई यादें उसके सीने में जलने लगीं

"इकाई...तुम होश में तो हो...यहाँ मैं तुम्हारे जन्मदिन 9 दिसम्बर पर सोच रहा था कि सबको ऑफिसियली बता दूँगा कि हम दोनों बहुत जल्द शादी....और तुम कह रही हो ये सब भूल जाऊँ...तुम मुझसे शादी नहीं..." हासिल ने उसके दोनों कंधे पकड़ के उसे झंझोड़ते हुए कहा

वो पत्थर की बनी बैठी रही बस उसके लब हिले " 9 नम्बर का रूलिंग प्लानेट मंगल होता है जो सेनापति है और सेनापति को ताज नहीं मिला करता....उसे अपनी सेना के लिए लड़ना होता है बस"

"तुम और तुम्हारी ये ब्लडी न्यूमरोलॉजी....देखो इकाई मैं जानता हूँ हमारी शादी आसान नहीं है...तुम्हारे पापा के जाने के बाद से...बट यू डोन्ट वरी... तुम्हारे घर का खर्च भी मैं उठा लूँगा और तुम्हारी दोनों बहनों की शादी भी अच्छे से...हम करवाएंगे न...याSSSर.." सब्र से काम लेते लेते आखिर में वो फिर से चीख उठा

"मैं फैसला कर चुकी हूँ...मैं किसी से भी शादी नहीं करूंगी" इकाई ने पथराई आँखों से कहा

"मैं तो ये भी नहीं कर सकता मेरी अम्मी का कोई ठिकाना नहीं कब वो चल बसें...ठीक है...अब तुम्हारे जन्मदिन पर ही..इकाई...मैं अपनी शादी का कार्ड भेजूँगा...और हाँ शादी भी अपने जन्मदिन 13 दिसम्बर को ही करूँगा...इस तरह हम दोनों के लिए एक दूसरे को याद करके रोने के दो ही दिन रहेंगे..दो नए दिन नहीं जुड़ेंगे" हासिल ने सरेंडर कर दिया हासिल की मर्जी नहीं चलती उसे तो अगले नम्बर पर जाना ही पड़ता है

अचानक चाय से इकाई के होंठ जले तो वो वापस आई उसकी अम्मी कुछ कहे जा रहीं थीं पर उसके कानों में कुछ नहीं जा रहा था उसने धीरे से कहा "9 अंक की इकाई सबसे बड़ी होती है अम्मी..उसमे अगर एक भी जुड़ जाए तो वो जीरो हो जाती है..और अगर कुछ और वो जोड़ ले तो वो छोटी हो जाती है फिर उससे छोटी इकाइयों का क्या होगा...और वैसे भी अम्मी..इकाइयों को हासिल नहीं मिला करते" और अपने कमरे में जाकर दरवाजा बंद कर लिया,लेकिन इस बार दरवाजा बंद करने की आवाज बहुत जोर से आई।

-तुषारापात®™