Tuesday, 18 August 2015

भीष्म कहाँ से लाऊँ

प्रयत्न करूँ मैं
जो सत्य की स्थापना का
तो कहते हैं वो
ये कार्य 'तुम्हारा' है
मुझको किसने दिया
धर्म का ध्वज
ये तो 'तुम्हारे' दसवें अवतार को फहराना है
गीता वाणी 'तुम्हारी'
मानते सभी पर कहते
अधर्म के विरुद्ध रण का शंख तो 'तुम्हे' ही बजाना है
देर न करो उत्तर दो शीघ्र
इस कुरुक्षेत्र-धर्मक्षेत्र में क्या
'तुम्हे' युधिष्ठिर को धृतराष्ट्र की ओर से लड़ाना है
नहीं अगर तो धर्म स्थापना कैसे हो
अब 'तुम्हारी' आज्ञा मानने वाला अर्जुन किसे बनाऊँ
हे कृष्ण!'तुमसे' शस्त्र उठवाने को भीष्म कहाँ से लाऊँ

-तुषारापात®™

हरा पत्ता

कुछ पीले पत्तों के
कहने में आकर
दरख्त ने अपने ही
एक हरे पत्ते को शाख से गिरा दिया
हरा पत्ता उसके पैरों में पड़ा
रोता रहा गिड़गिड़ाता रहा
पर शाख जिसकी न हो उसकी सुनता कौन है
हरे पत्ते ने भी ठान लिया
तपस्या की
खुद को गला कर
खाद बनकर मिट्टी के रस्ते दरख्त में जा मिला
और
फूल बनकर उस दरख्त की कारगुजारी को महका दिया
-तुषारापात®™