Wednesday, 19 October 2016

पौना चाँद

भूखा प्यासा बैठा है सुबह से उम्रे यार के लिए
पूरा चाँद बेकरार है पौने चाँद के दीदार के लिए

-तुषारापात®™

Tuesday, 18 October 2016

जोदि तोर डाक शुने केऊ ना आसे तबे एकला चलो रे

 "आपके विचारों ने तो पूरे विश्व को हिला दिया है..सब आपको लाइव सुनना और देखना चाहते हैं..पर दादा...आपका यहाँ हिंदी में अपना व्याख्यान देना मुझे कतई समझ नहीं आया"

"क्यों..इसमें कौन सी नई बात हो गई...हर जगह अब तक हिंदी में ही तो भाषण देते आया हूँ"

"पर दादा...वो तो हिंदुस्तान की बात थी...मगर यहाँ..लंदन में कितने अंग्रेज आपकी बात समझ पाए होंगे"

"तो फिर मेरे लेख उन्हें कैसे समझ आते थे.आखिर उन्हीं लेखों से प्रभावित होकर ही तो उन्होंने मुझे यहाँ बुलाया है"

"दादा..आपके लेख तो यहाँ अंग्रेजी में अनुवादित होकर छपते हैं.. ये तो कहो कि सबको आपके भाषण की ट्रांस्लेटेड कॉपी दे दी गई थी..पर आप अगर खुद अंग्रेजी में बोलते तो बात ही अलग होती..मैं तो बस इतना ही कहुँगा..कि..आपने इन अंग्रेजों पे अपना प्रभाव जमाने का एक बहुत ही बेहतरीन मौका गँवा दिया..

"हा हा हा अनाड़ी हूँ न..वैसे अनुवाद चाहे जितना अच्छा हो मगर किसी विचार का समग्र भाव उसी भाषा से प्रकट होता है जिस भाषा में वो सोचा या लिखा गया हो"

"अनाड़ी नहीं..आप जिद्दी हो...रुकिए शायद बाहर दरवाजे पे कोई आया है.. घन्टी बजी है..एक तो इन अंग्रेजों ने इतना बड़ा सुईट बुक करवाया है कि इस कमरे से पहले कमरे तक जाने में लगता है मानो कलकत्ता जा रहा हूँ..आप आराम कीजिये..मैं देख के आता हूँ"

"क्या हुआ...भई.. बड़ी देर लगा दी..कौन था"

"दादा..आप जीनियस हो..आपकी हर बात समझना आसान नहीं.. आप अनाड़ी नहीं..जबरदस्त खिलाड़ी हो.. अब मुझे सब समझ आ गया"

"हैं..इतनी जल्दी राय बदल गई..क्या हो गया बाहर जाते ही"

"दादा..बाहर कोई मिस्टर थॉमस ब्राउन आये हैं...शायद यहाँ के शिक्षा विभाग में किसी पद पर हैं..आपका इंतज़ार कर रहे हैं..उनके साथ दस ग्यारह शिक्षक भी हैं..सबका कहना है वो हिंदी पढ़ना और समझना चाहते हैं"

"ह्म्म्म.. दस ग्यारह में से एक भी सीख गया तो ये संक्रमण आरम्भ हो जायेगा...किसी भारतीय का यहाँ आना और हजारों अंग्रेजों को अंग्रेजी में भाषण सुनाना कोई बड़ी बात नहीं..बात तो तब है जब थोड़े ही सही कुछ अंग्रेज हिंदी बोलें..चलो मिलते हैं उनसे"

-तुषारापात®™