Wednesday, 2 January 2019

अँगूठाछाप

कि पसंद,मोहब्बत,हँसी,हैरत,ग़म या गुस्सा
अँगूठाछाप-ता है सारे जज़्बात,तुम लिखो जो भी किस्सा

~तुषारापात®

Tuesday, 1 January 2019

इक्कीस

जाता हुआ दिसम्बर कह गया जनवरी से
सब इक्कीस हों कोई उन्नीस न रहे इस सदी में

~तुषारापात®

Monday, 31 December 2018

बालिग सदी

आई है शगुन लेकर दिसम्बर के घर जनवरी
रचाओ स्वयंवर बालिग हुई है इक्कीसवीं सदी

#तुषारापात®

Wednesday, 19 December 2018

माथे की दरारों में मिट्टी है

मैं किस्मत,सोने सी करने को,सजदा करता हूँ
मेरे माथे की दरारों में,अब हर दर की,मिट्टी है

~तुषारापात®

Friday, 14 December 2018

त्रिवेणी

छोड़ जाने वालों के नाम बुदबुदाने से
जान बच गई मगर होठ नीले पड़ गए

सांप काटे का अब वो जानता है मंतर

(पहली पंक्ति के साथ तीसरी पंक्ति पढ़िए और दूसरी पंक्ति के साथ तीसरी पंक्ति पढ़िए दो शे'र मिलेंगें बाकी त्रिवेणी तो है ही)
~तुषारापात®

Wednesday, 12 December 2018

आँखों की दावातें

आँखों की दावातें जो न छलकीं थीं तो
क्यूँ गालों से गीली इबारतें मिटा रहा था

#तुषारापात®

मोल

वो चाँदी को ताँबा बना रहा था
सफेद बालों में मेहंदी लगा रहा था

~तुषारापात®

Monday, 10 December 2018

भगवान के कान

नहीं जानते कि क्या है भगवान कहीं
मगर ये तय है कि हमारी ओर उसके कान नहीं

~तुषारापात®

Thursday, 6 December 2018

टर्म्स एंड कंडीशन

ज़िन्दगी कुछ टर्म्स एंड कंडीशंस पे मिली है हमें
आसमाँ पे ये इतने स्टार यूँ ही नहीं लगाए उसने

*कंडीशन अप्लाई
~तुषारापात®

Tuesday, 20 November 2018

ईश्वर तुझे क्षमा,मैं अपना यह जनम करता हूँ

चक्षु कमंडल से मेरे
छलकते,ये
श्राप के छींटे
तुझ पर पड़ जाएं

सात तहों के
अम्बर के
परिधान तेरे जल जाएं

जनम मरण
काल अकाल से परे
ओ भाग्यविधाता

जा इस क्षण ही
करतल रेखाओं में तेरी
समय चक्र पड़ जाएं

नहीं स्वीकार,तेरी
निरंकुश सत्ता,मैं
विद्रोह करता हूँ

भंग में लीन भगवान
निर्दयी,तुझसे,भंग
अपना मोह करता हूँ

मोक्ष का मेरा भाग
संसार से गुणन करता हूँ
तेरा सब ऋण,धन करता हूँ
ईश्वर तुझे क्षमा,मैं
अपना यह जनम करता हूँ।

~तुषारापात®

Wednesday, 14 November 2018

हुनर

बड़ी मुश्किल से आता है
दो सीधी लाइनों के बीच लिखने का
हुनर आदमी को
हथेली की
आड़ी तिरछी लकीरों पे
लिखने वाले को ख़ुदा होना ही था

~तुषारापात®

Sunday, 4 November 2018

प्रतिच्छेदन

नदी के व्यास पे
नाव के अर्धवृत्त पर तैरता
एक बिंदु
पतवारों की चाप से
क्षितिज का प्रतिच्छेदन कर
केंद्र होने चला है।

~तुषारापात®

Tuesday, 30 October 2018

कुँआ

कुँए के साथ
यही होता है
प्यासा आता है
प्यास बुझाता है
चला जाता है
कुँआ
बाल्टी की चोट से उठी
उथल पुथल संभालता
कराहता ये सुनता रह जाता है
घमंडी कुँए तू
प्यासे के पास नहीं जाता है।

~तुषारापात®

Monday, 8 October 2018

नोंकझोंक

"आपके यहाँ तो समोसा भी साहित्यिक बनता होगा..मतलब जब पति-पत्नी दोनो ही इतना अच्छा लिखने वाले हों तो..हर बात साहित्यिक रूप में ही होती होगी"

"मेरे एक जानने वाले दंपति हैं..पति पत्नी दोनो स्थापित गायक हैं..एक बार जब मैं उनसे मिलने..उनके घर गया तो दरवाज़े से ही उन लोगों के झगड़े की बहुत तेज आवाज़ें आ रहीं थीं...आपकी इस बात से आज मुझे ज्ञात हुआ कि शायद उस दिन वो लोग सुर में झगड़ रहे थे"

"हाहाहा...इंटरव्यू मैं ले रहा हूँ..और खिंचाई आप कर रहे हैं..वैसे ये कहा जाता है कि चोटी पर एक ही जगह होती है..क्या कभी अभिमान फिल्म के जैसा कुछ..."

"हम्म एक ताजी घटना सुनिए..अभी कुछ दिनों पहले मेरी पत्नी ने अंग्रेजी में लिखा-
You fall in love
with a person's unique edition
at a unique moment
Edition is revised every year
but you expect the same version still...
Your fault.
मैंने उनकी इन पंक्तियों की तारीफ की और कहा कि इसका तो हिंदी अनुवाद होना चाहिए..तो उन्होंने कहा कि इसका हिंदी अनुवाद संभव ही नहीं"

"लीजिये वही बात आ गई यही तो मैं भी कह रहा था..ये अभिमान की बात हुई न..अपने लेखन की श्रेष्ठता और ईर्ष्या दोनो दिखीं"

"श्रेष्ठता और ईर्ष्या नहीं..बात प्रतिस्पर्धा की है..और प्रतिस्पर्धा कलात्मकता को निखारती है जिससे पाठक की जिज्ञासा बढ़ती है और साहित्य का उत्कर्ष होता है...मेरा मानना है कि अभिमान के पहाड़ होते हैं जिनकी चोटियाँ नुकीली होतीं हैं..सफलता का मैदान होता है...विशाल मैदान...आप इस मैदान पे जितना भी चलो..प्यास बुझाने को एक नदी का होना आवश्यक है..समय समय पर हम एक दूसरे को उकसा के अभिमान के पहाड़ पिघलाते रहते हैं..जिससे ये नदी बनी रहे..जिससे हम दोनों तृप्त होते रहें..और पाठकों को तृप्त करते रहें"

"मतलब आप दोनों एक दूसरे के वैद्य हैं...नुस्खों को खुद पे आजमाते हैं फिर पढ़ने वालों का साहित्यिक इलाज करते हैं..अब तो जिज्ञासा बहुत बढ़ गई..उनकी पंक्तियों का आपके द्वारा किया गया अनुवाद जानने की..चलते चलते सुना दीजिये..हम भी तो जानें कि आपका अनुवाद श्रेष्ठ था या उनकी पंक्तियाँ"

"श्रेष्ठ तो भाव ही होता है और सदैव रहेगा..अनुवादक उस भाव को अपने पाठकों की भाषा के परिधान में प्रस्तुत करने वाला माध्यम मात्र है..आपकी रिपोर्टरी फितरत की शांति के लिए..अनुवाद ये रहा-

वय का विशिष्ट क्षण
प्रियतम का अद्वितीय संस्करण
बढ़ा हृदय त्वरण,प्रेम में
कराता,हृदय का अवरोहण

हो जाता वह विशिष्ट संस्करण
ओढ़कर प्रतिवर्ष नव-आवरण
ढूँढते,हम वही प्रथम संस्करण
भूलकर क्यों,काल का आरोहण।"

~तुषारापात®

Thursday, 4 October 2018

अँगूठा वापसी

अनलाइक करके अपना अँगूठा वापस ले जाने वाले एकलव्य,ड्रोन बनकर पेज पर भ्रमण करते हैं।

#तुषारापात®

Tuesday, 2 October 2018

रहिमन

रहिमन वे नर तर गए जो 'सुंदरअभिव्यक्ति' कह जाईं
उनसे पहले वे तरे जिनके मुखसे कछु निकसत नाहीं

#तुषारापात®

Sunday, 30 September 2018

बात

बात लंबी होने लगे गर
बात को घुमा दिया करो

बात जब तू तू मैं मैं पे पहुँचे
बात में 'हम' लगा दिया करो

-तुषारापात®

Sunday, 23 September 2018

ड्रैगन

विवाह आग उगलने वाला वो ड्रैगन जिसकी लपटों में समझदार ही रोटी सेंक पाते हैं।

Saturday, 22 September 2018

मोल

तुझे पहनने के बाद,लोग ढूँढते हैं मुझे
शीशे ने,धीरे से,हीरे से,कहा इतना ही

#तुषारापात®

Wednesday, 19 September 2018

उदासी के फूल

आबे चश्म काफी था अब्रे बहार फ़जूल आए हैं
इंतज़ार की लंबी बेलों पर उदासी के फूल आए हैं

~तुषारापात®