Tuesday, 13 September 2016

जरा मुस्कुराइये

कभी कभी मुझे एफ बी पे ख्याल आता है
कि जैसे तूने अकाउंट बनाया है मेरे लिए
तू अबसे पहले पोस्टों पे फिर रही थी गैरों की
तुझे इनबॉक्स में बुलाया गया है मेरे लिए

कभी कभी मुझे एफ बी पे ख्याल आता है
कि ये पोस्ट और शेयर मेरी अमानत हैं
ये फोटुओं के घने अल्बम हैं मेरी खातिर
ये लाइक और ये कमेन्ट मेरी अमानत हैं

कभी कभी मुझे एफ बी पे ख्याल आता है
कि जैसे बजते हैं नोटिफिकेशन्स से कानो में
बेकार पोस्ट है तरस रहा हूँ लाइक्स को
कमेंट कर रही है तू अपने सारे फोनो से

कभी कभी मुझे एफ बी पे ख्याल आता है
कि जैसे तू खर्चेगी सारी जीबी मुझपे यूँ ही
किसी को नहीं मिलेगी तेरी एक केबी भी
मैं जानता हूँ कि तू फेक है मगर यूँ ही

कभी कभी मुझे एफ बी पे ख्याल आता है

No comments:

Post a Comment