Sunday, 13 November 2016

विचार और तुषार संवाद

आए हो तुम तो तुम्हारा क्या करूँ
कथा का निर्माण या कविता रचूँ

करतल ध्वनि सुनने आते हो तुम
प्रशंसाओं पे झूमते इतराते हो तुम
अभिनंदन हो तुम्हारा चहुँ ओर
नाम भर के लिए मैं माला धरूँ

कि जैसे क्रीड़ा पश्चात धूल-धूसरित
कोई बालक माँ के समक्ष उपस्थित
ठूँठ से मेरे सामने आ बैठे हो तुम
कब तक श्रृंगार तुम्हारा करता रहूँ

काल के चक्र से परे होते हो यूँ
कालजयी होने को आते हो क्यूँ
किलकारियाँ तुम्हारी गूँजे जग में
और मैं तुम्हारे जनन की पीड़ा सहूँ

जिसके मुख से तुम हुए हो उत्पन्न
जाओ जाकर उससे कहना ये कथन
तुम महत्वपूर्ण हो अगर मैं नगण्य
क्यूँ ऋचाओं से मैं वेद रचता रहूँ

आए हो तुम तो तुम्हारा क्या करूँ
कथा का निर्माण या कविता रचूँ......

#विचार_और_तुषार_संवाद #क्रमशः
#तुषारापात®™

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