Tuesday, 14 June 2016

मिलावट की बनावट

मुझे ये समझ नहीं आता कि ये खाने में मिलावट को लेकर भाई लोग इतना हो हल्ला क्यों करते हैं जबकि हमारे देश की संस्कृति ही मिलीजुली संस्कृति है भौगोलिक स्थिति सत्तर तरीके की है कहीं पहाड़ कहीं समुद्र कहीं रेगिस्तान साथ ही धर्म बोली भाषा रहन सहन पहनावा तक सबकुछ मिला जुला है और तो और अभी कुछ समय पहले तक मिलीजुली सरकार ही देश भी चलाती थी वो भी मिश्रित अर्थव्यवस्था के दम पे,तो पूरे देश में ऐसी कोई चीज बताओ जिसमे मिलावट न हो ?

लगता है ये आम लोगों के दिमाग ख़राब कर दिए हैं इन दो चार पूर्ण बहुमतों वाली सरकारों ने,तभी ये खाने में मिलावट जैसी 'महान उपकारी योजना' को समझ नहीं पा रहे हैं इसका एक कारण मिलावट वाली शिक्षा पद्धति भी हो सकती है पढ़ पढ़ के सब अपने को बहुत काबिल समझने लगे हैं जो खाने में मिलावट के महत्व को नकार के उसका विरोध कर रहे हैं
अरे जरा सी मिलावट क्या कर दी लगे बवाल मचाने ,विरोध करने के पहले
कभी सोचा है खाने में मिलावट कितनी बड़ी धार्मिक आर्थिक राजनैतिक और सामाजिक 'क्रांति' है'मूर्खो! तुम्हें तो ऐसे लोगों के पैर धो धो कर पीने चाहियें जो खाने पीने में मिलावट करते हैं लेकिन नहीं तुम ठहरे लकीर के फ़कीर और लकीर भी गेंहू के पेट पे बनी वाली ही तुम्हें दिखाई देती है

खाने में मिलावट करने वाला अगर खाने में मिलावट नहीं करेगा तो ये जो तुमने इतनी जनसंख्या बढ़ा रखी है इसको खाना पूरा पड़ेगा बोलो? नहीं न तो खाने पीने की चीजों में मिलावट करने से उनकी मात्रा में बढोत्तरी होती है जिससे सभी देशवासियों को भोजन मिलता है और तो और कभी कभी वो जहर मिला कर जनसंख्या कम करने जैसा महान कार्य भी करते हैं जिससे देश पर आश्रित लोगों का बोझ कम होता है और अंतिम संस्कार कराने वालों को रोजगार प्राप्त होता है वो अलग ,मतलब ये तो वो बात हो गई कि आम के आम गुठलियों के दाम हाँ अब ये न पूछना कि आम डाल का या पाल का पका था वरना मिलावट का एक और पहलु सामने आ जायेगा।

मिलावट से मरने वाले लोगों का मुद्दा उछाल उछाल के सरकारें बदल जाती हैं जिससे हमें नई सरकारों के द्वारा पिछली सरकारों के किये घोटाले काले कारनामो का पता चलता है और हम जागरूक होते हैं कि हम और कितना पीछे चले गए ,तुम क्या जानो ये मिलावट से कितने बड़े रहस्य छुपते और खुलते हैं।

खाने में मिलावटी सामान मिलाने से सबको आर्थिक फायदा होता है और जब सबका कमीशन इससे जुड़ा होता है तो सेवा भी त्वरित होती जिसके फलस्वरूप खाने पीने का सामान बहुत जल्दी हम तक पहुँच जाता है नहीं तो बैठे रहते तुम खाली झोला लेके इंतज़ार में,और एक और विशेष प्रकार का रोजगार पैदा होता है मिलावट की इस पुण्य प्रदान करने वाली क्रिया से वो है तमाम तरह की मिलावट करने वाली चीजों का जुगाड़ करना जैसे दाल में कौन से पत्थर मिलाये जाएँ अब इस तरह के न जाने कितने पत्थर पाउडर चूरन चटनी केमिकल आदि आदि बनाये और बेचे जाते हैं कितने पढ़े लिखे लोगों को रोजगार मिलता है लेकिन तुम बुद्धू ये बातें क्या जानो।

मिलावट नए नए आविष्कारों की जन्मदाता है इससे देश में वैज्ञानिक सोच का विकास होता है मिलावटी नित नए प्रयोग किया करते हैं कि दूध में क्या मिलाया जाय जो लगे दूध जैसा और पकड़ में न आये और तेल घी में ऐसा क्या मिलाएं जो तेल घी जैसी चिकनाहट लिए हुए हो पर तेल या घी न हो ये एक बहुत मेहनत का काम है फिर भी परोपकारी लोग इसमें लगे हुए हैं मिलावट में अपार संभावनाएं हैं न जाने कितने ऐसे पदार्थों का निर्माण इसी मिलावट के धंधे से सम्भव हो सका है जिससे पढ़ने वालों को नए नए सब्जेक्ट पढ़ने पड़ रहे हैं जिससे अलग अलग एक्सपर्ट तैयार हो रहे हैं कितने ही नर्सिंग होम इसी मिलावट के शिकार लोगों का शिकार करके अपनी जीविका चला रहे हैं बड़ी बड़ी कम्पनियाँ 'शुद्ध' 'शुद्धतम' का लोगो लगा के आम चीजों को महंगा करके अलग से एक बाजार का निर्माण कर रही हैं और देश का चहूँमुखी विकास कर रहीं हैं।

खबरदार अगर आगे से तुमने मिलावट का रोना रोया आम इंसान तू खुद दो लोगों के मेल से पैदा हुआ है तुझे मिलावट जैसी अत्यंत शुद्ध चीज पे ऊँगली उठाने की इजाजत नहीं है शुद्ध खाना तेरे और भगवान के मिलन में बहुत बड़ी बाधा है इसलिए चुपचाप मिलवाटी खाना खाता जा और जल्दी से भगवान से जाकर मिल और इस मिलावटी संसार से विदा ले।

-तुषारापात®™

1 comment:

  1. This is the way to think differently.Appreciable!

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