Tuesday, 18 August 2015

हरा पत्ता

कुछ पीले पत्तों के
कहने में आकर
दरख्त ने अपने ही
एक हरे पत्ते को शाख से गिरा दिया
हरा पत्ता उसके पैरों में पड़ा
रोता रहा गिड़गिड़ाता रहा
पर शाख जिसकी न हो उसकी सुनता कौन है
हरे पत्ते ने भी ठान लिया
तपस्या की
खुद को गला कर
खाद बनकर मिट्टी के रस्ते दरख्त में जा मिला
और
फूल बनकर उस दरख्त की कारगुजारी को महका दिया
-तुषारापात®™

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