Sunday, 20 September 2015

नसीब

अपनी पूरी दावात उड़ेल कर
खुदा ने नीले आसमान को स्याह किया
फिर चमकती कलम से कुछ लिख दिया
हाँ तुम्हें यकीन नहीं होगा
मगर ये चाँद तारे उसकी ही लिखावट हैं
मैं पढ़ता हूँ इन्हें हर्फों और लफ़्ज़ों की तरह
किसी रात जब आसमान साफ़ हो
मेरे साथ बैठना
नक्षत्रों की इबारतें तुम्हारी हथेली में दिखा दूँगा
तुम्हारा नसीब बता दूँगा
अपना नसीब बना लूँगा।

-तुषारापात®™
© tusharapaat.blogspot.com

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