Thursday, 4 May 2017

गुलाबी

जाने क्यों उस दिन आसमान गुलाबी था?...हवा-ए-इश्क जिस्म की पाँचों खिड़कियों से गुज़र के तुम्हें हवामहल बनाये थी...लाज के पत्ते अपनी शाख छोड़ रहे थे...नारंगी सूरज आँखों में डूब सुरूर के लाल डोरे तैरा रहा था..आदमी जब इश्क में  जयपुर बना हो तो...कानपुर का काला आसमान भी उसे गुलाबी दिखाई देता है।

-तुषारापात®

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