Tuesday, 2 February 2016

नास्तिक

"आप से कुछ पूछना चाहता हूँ"

"हाँ हाँ पूछिये"

"हो सकता है मेरी बातों से आपको अच्छा न लगे..पर मेरे मन में ये बात बार बार उठती है..तो..अगर आपको बुरा लगे तो मैं पहले ही क्षमा माँगता हूँ"

"अरे..ऐसी कोई बात नहीं आप निंसंकोच पूछिये"

"देखिये..मैं एक नास्तिक हूँ..ईश्वर में विश्वास नहीं करता..मूर्ती पूजा धार्मिक कर्मकाण्ड पूजा पाठ इबादत नमाज इन सबको नहीं मानता ...मैंने इससे जुड़े सारे विचारों और सारी मान्यताओं का गहन अध्ययन भी किया है बहुत सारा विरोध भी सहा है...स्वामी विवेकानंद जी का राजा साहब को उनकी तस्वीर के लिए दिया गया वो उत्तर भी जानता हूँ और बुद्ध को मानने वालों को उनकी ही मूर्ति बनाते और पूजते भी देखा है...और ये भी सुना है कि ईश्वर को न मानना भी उसको स्वीकार करने जैसा है"

"मैं आपकी बात तो समझ रहा हूँ..पर ये समझ नहीं पा रहा हूँ कि आप मुझसे क्या पूछना चाह रहे हैं आप खुद ही अपने प्रश्न रख रहे हैं और उत्तर भी स्वयं रख रहे हैं"

"देखिये मैंने पहले ही आपसे कहा था..कि.शायद आपको अच्छा न लगे... पर मेरी परेशानी समझिये...मैं जानता हूँ कि आप धार्मिक और आध्यात्मिक इंसान हैं इसलिए सोचा आपसे...मैंने देखा है आप रोजमर्रा की बातों से कई कहानियाँ बनाते हैं और वो बड़ी कमाल की होती हैं कई बार उन्हें पढ़के मुझे राह सूझ जाती है...मैं बहुत बड़ी बड़ी बातों से ऊब चूका हूँ...ग्रंथों को पढ़ पढ़ कर भी समझ नहीं सका कि इस वक्त मेरी स्थिति क्या है मैं नास्तिक हूँ या नहीं बस यही मैं आपसे समझना चाहता हूँ वो भी कोई ऐसी रोजमर्रा की चीज से समझा दीजिये जो बहुत साधारण सी हो...प्लीज"

"हम्म...लीजिये चाय आ गई...मैं बनाता हूँ आपके लिए...चीनी कितनी एक चम्मच?"

"नहीं मुझे डायबिटीज है...शक्कर नहीं लेता...ऐसे मौकों के लिए सुगर फ्री रखता हूँ जेब में हमेशा...मैं इसकी दो गोलियाँ मिला लूँगा"

"ओह्ह...अच्छा अगर मैं ये कहूँ कि चीनी मात्र एक माध्यम है मीठे स्वाद को पाने के लिए और ये जो मिठास है वही ईश्वर है तो?...आपने चीनी छोड़ दी और स्वयं को नास्तिक घोषित कर दिया पर मिठास तो आप अभी भी चख रहे हैं बस माध्यम बदल दिया है...यही है आपकी स्थिति...लीजिये बिस्किट लीजिए।"

-तुषारापात®™

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