Monday, 5 October 2015

चाँद की रिश्वत

कहना चाहा स्याह रात ने जब उजले दिन का सच
ख़ुदा ने उसके होंठो पे चमकीला चाँद रखा और खामोश कर दिया

-तुषारापात®™

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