Friday, 4 September 2015

न आना मेरे देश मेरे कृष्णा!


फिर
तुम्हे बुलाएँगे
हम

एक दिन को
साल के बाकी समय तुम कहाँ रहते हो ?
शायद
अपने
नाम पे
दूकान
चलाने वालों के यहाँ चले जाते होगे
हर शख़्स तक
तुमको पहुँचाना जो है उन्हें
इसलिए
हर
साल एक नया कृष्ण बुलाते हैं
बड़ी परेशानियाँ पैदा कर दी हैं तुमने
बार
बार आकर
सबके
अपने अपने मॉडल के कृष्ण हो गए हैं
तुम्हारे नाम पे
खूब
 ठगा जाता है कई बार हमें
हर बार पूरी कीमत देते हैं
तुम

छटांक भर भी नहीं मिलते
अबकी
आओ
तो इस मार्किट में
तो
फुल गारंटी के साथ आना
नहीं तो
आना मेरे देश मेरे कृष्णा ! आना मेरे देश मेरे कृष्णा!
-तुषारापात®™






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