Monday, 10 December 2018

भगवान के कान

नहीं जानते कि क्या है भगवान कहीं
मगर ये तय है कि हमारी ओर उसके कान नहीं

~तुषारापात®

Thursday, 6 December 2018

टर्म्स एंड कंडीशन

ज़िन्दगी कुछ टर्म्स एंड कंडीशंस पे मिली है हमें
आसमाँ पे ये इतने स्टार यूँ ही नहीं लगाए उसने

*कंडीशन अप्लाई
~तुषारापात®

Tuesday, 20 November 2018

ईश्वर तुझे क्षमा,मैं अपना यह जनम करता हूँ

चक्षु कमंडल से मेरे
छलकते,ये
श्राप के छींटे
तुझ पर पड़ जाएं

सात तहों के
अम्बर के
परिधान तेरे जल जाएं

जनम मरण
काल अकाल से परे
ओ भाग्यविधाता

जा इस क्षण ही
करतल रेखाओं में तेरी
समय चक्र पड़ जाएं

नहीं स्वीकार,तेरी
निरंकुश सत्ता,मैं
विद्रोह करता हूँ

भंग में लीन भगवान
निर्दयी,तुझसे,भंग
अपना मोह करता हूँ

मोक्ष का मेरा भाग
संसार से गुणन करता हूँ
तेरा सब ऋण,धन करता हूँ
ईश्वर तुझे क्षमा,मैं
अपना यह जनम करता हूँ।

~तुषारापात®

Wednesday, 14 November 2018

हुनर

बड़ी मुश्किल से आता है
दो सीधी लाइनों के बीच लिखने का
हुनर आदमी को
हथेली की
आड़ी तिरछी लकीरों पे
लिखने वाले को ख़ुदा होना ही था

~तुषारापात®

Sunday, 4 November 2018

प्रतिच्छेदन

नदी के व्यास पे
नाव के अर्धवृत्त पर तैरता
एक बिंदु
पतवारों की चाप से
क्षितिज का प्रतिच्छेदन कर
केंद्र होने चला है।

~तुषारापात®

Tuesday, 30 October 2018

कुँआ

कुँए के साथ
यही होता है
प्यासा आता है
प्यास बुझाता है
चला जाता है
कुँआ
बाल्टी की चोट से उठी
उथल पुथल संभालता
कराहता ये सुनता रह जाता है
घमंडी कुँए तू
प्यासे के पास नहीं जाता है।

~तुषारापात®

Monday, 8 October 2018

नोंकझोंक

"आपके यहाँ तो समोसा भी साहित्यिक बनता होगा..मतलब जब पति-पत्नी दोनो ही इतना अच्छा लिखने वाले हों तो..हर बात साहित्यिक रूप में ही होती होगी"

"मेरे एक जानने वाले दंपति हैं..पति पत्नी दोनो स्थापित गायक हैं..एक बार जब मैं उनसे मिलने..उनके घर गया तो दरवाज़े से ही उन लोगों के झगड़े की बहुत तेज आवाज़ें आ रहीं थीं...आपकी इस बात से आज मुझे ज्ञात हुआ कि शायद उस दिन वो लोग सुर में झगड़ रहे थे"

"हाहाहा...इंटरव्यू मैं ले रहा हूँ..और खिंचाई आप कर रहे हैं..वैसे ये कहा जाता है कि चोटी पर एक ही जगह होती है..क्या कभी अभिमान फिल्म के जैसा कुछ..."

"हम्म एक ताजी घटना सुनिए..अभी कुछ दिनों पहले मेरी पत्नी ने अंग्रेजी में लिखा-
You fall in love
with a person's unique edition
at a unique moment
Edition is revised every year
but you expect the same version still...
Your fault.
मैंने उनकी इन पंक्तियों की तारीफ की और कहा कि इसका तो हिंदी अनुवाद होना चाहिए..तो उन्होंने कहा कि इसका हिंदी अनुवाद संभव ही नहीं"

"लीजिये वही बात आ गई यही तो मैं भी कह रहा था..ये अभिमान की बात हुई न..अपने लेखन की श्रेष्ठता और ईर्ष्या दोनो दिखीं"

"श्रेष्ठता और ईर्ष्या नहीं..बात प्रतिस्पर्धा की है..और प्रतिस्पर्धा कलात्मकता को निखारती है जिससे पाठक की जिज्ञासा बढ़ती है और साहित्य का उत्कर्ष होता है...मेरा मानना है कि अभिमान के पहाड़ होते हैं जिनकी चोटियाँ नुकीली होतीं हैं..सफलता का मैदान होता है...विशाल मैदान...आप इस मैदान पे जितना भी चलो..प्यास बुझाने को एक नदी का होना आवश्यक है..समय समय पर हम एक दूसरे को उकसा के अभिमान के पहाड़ पिघलाते रहते हैं..जिससे ये नदी बनी रहे..जिससे हम दोनों तृप्त होते रहें..और पाठकों को तृप्त करते रहें"

"मतलब आप दोनों एक दूसरे के वैद्य हैं...नुस्खों को खुद पे आजमाते हैं फिर पढ़ने वालों का साहित्यिक इलाज करते हैं..अब तो जिज्ञासा बहुत बढ़ गई..उनकी पंक्तियों का आपके द्वारा किया गया अनुवाद जानने की..चलते चलते सुना दीजिये..हम भी तो जानें कि आपका अनुवाद श्रेष्ठ था या उनकी पंक्तियाँ"

"श्रेष्ठ तो भाव ही होता है और सदैव रहेगा..अनुवादक उस भाव को अपने पाठकों की भाषा के परिधान में प्रस्तुत करने वाला माध्यम मात्र है..आपकी रिपोर्टरी फितरत की शांति के लिए..अनुवाद ये रहा-

वय का विशिष्ट क्षण
प्रियतम का अद्वितीय संस्करण
बढ़ा हृदय त्वरण,प्रेम में
कराता,हृदय का अवरोहण

हो जाता वह विशिष्ट संस्करण
ओढ़कर प्रतिवर्ष नव-आवरण
ढूँढते,हम वही प्रथम संस्करण
भूलकर क्यों,काल का आरोहण।"

~तुषारापात®

Thursday, 4 October 2018

अँगूठा वापसी

अनलाइक करके अपना अँगूठा वापस ले जाने वाले एकलव्य,ड्रोन बनकर पेज पर भ्रमण करते हैं।

#तुषारापात®

Tuesday, 2 October 2018

रहिमन

रहिमन वे नर तर गए जो 'सुंदरअभिव्यक्ति' कह जाईं
उनसे पहले वे तरे जिनके मुखसे कछु निकसत नाहीं

#तुषारापात®

Sunday, 30 September 2018

बात

बात लंबी होने लगे गर
बात को घुमा दिया करो

बात जब तू तू मैं मैं पे पहुँचे
बात में 'हम' लगा दिया करो

-तुषारापात®

Sunday, 23 September 2018

ड्रैगन

विवाह आग उगलने वाला वो ड्रैगन जिसकी लपटों में समझदार ही रोटी सेंक पाते हैं।

Saturday, 22 September 2018

मोल

तुझे पहनने के बाद,लोग ढूँढते हैं मुझे
शीशे ने,धीरे से,हीरे से,कहा इतना ही

#तुषारापात®

Wednesday, 19 September 2018

उदासी के फूल

आबे चश्म काफी था अब्रे बहार फ़जूल आए हैं
इंतज़ार की लंबी बेलों पर उदासी के फूल आए हैं

~तुषारापात®

Monday, 17 September 2018

लज़्ज़त

उनकी तस्वीर की सारी लज़्ज़त हमारी आँखों के गुनाह से है।

~तुषारापात®

भगवा हरा

रात के हरे ज़ख्मों पे
भगवा सूरज मरहम लगाता है
दिन सेकुलर हो जाता है

शाम को
तेरी यादों का नमक लेकर
चाँद दंगा कराता है।

~तुषारापात®

हरा भगवा

भगवा सूरज
हरी हरी फसलें उगाके
सेकुलर हो जाता है

आदमी
सूर्य-नमस्कार करके
कम्युनल हो जाता है।

~तुषारापात®

Saturday, 15 September 2018

प्रार्थना

कान पे
भिनभिनाता
मच्छर मारा गया

प्रार्थना करती
भीड़ पे
मंदिर गिरा

~तुषारापात®

Wednesday, 12 September 2018

फ़ना

फ़ना हो जाएंगे 'तुषार' तो ख़ुदा हो जाएंगे
अभी इस बुत की खोज में बस काफ़िर ही आएंगे

#तुषारापात®

Monday, 10 September 2018

90's का ज़माना

तुम
गले लग के
मुझमें ही
फुसफुसाया करतीं थीं

रिसीवर
कानों से
लगते ही ऐसा लगता था

और
उँगलियाँ
तार के छल्लों में फँसा के

ज़ुल्फों को
तेरी मैं खूब
सुलझाया करता था

उन दिनों
बात करना ही
तुझसे लिपट जाना होता था

लैंडलाइन का
वो ज़माना भी
क्या ज़माना होता था।

~तुषारापात®

Friday, 7 September 2018

ओ लड़के सिगरेट न सुलगाना

"हैं..क्या..स्त्री फिलम की कहानी जैसा..आपके साथ हो रहा है .. अमां.. मतलब..कुछ भी सत गुरुदत्त उड़ा रहे हैं..गररर..गरर..थू..कमाल है फिलमों का..पहले आदमी ख़ुद को शैहरुख ख़ाँ समझता था.. अब.. गलीं के लौंडे..राजकुमार राव बन रहें हैं.." केसर भाई ने कुल्ला करके लोटा एक और रखा और पानदान से  एक गिलौरी उठा के उसकी गिरह खोलते हुए बोले

वैधानिक तिवारी बेचैनी से इधर उधर चहलकदमी कर रहा था, अपने गले पे चुटकी काटते हुए वह उनसे कहता है  "अम्मा कसम ..केसर भइया.. अम्मा कसम.. सच कह रहें हैं...स्त्री पिक्चर की बात नहीं..कैसे समझाएं.. यार..सच में वो हमें नजर आती है..डराती है..हालत ये है कि ..डर के मारे चालीसा तक नहीं पढ़ी जाती उसके सामने"

"अमां..वैदानिक..सुबह ही सुबह ही क्या राजा ठंडाई चले गए थे..नज़र आती है..नज़र आती है..तो..ज़रा बुलाइये यहाँ.. हम भी तो देखें ये चुड़ैलें आखिर दिखतीं कैसीं हैं...वैसे..जनाब से आकर क्या गुफ़्तगू फरमाती हैं मोहतरमा..वाह..ये है बेहतरीन कनकौआ" केसर भाई इतनी देर में एक पतंग के कन्ने बांध चुके थे,पतंग की धनुषाकार तीली के दोनों सिरों को अपनी ओर मोड़ के उसका मिज़ाज चेक कर उससे ये कहते हैं और उसे छुड़ईया देने का इशारा करते हैं

"अमां भइया.. यहाँ हमारी नींद उड़ी पड़ी है...और आपको कनकउए उड़ाने की पड़ी है" वैधानिक पक्के पुल की तरह लाल होते हुए बोला " ऐसे नहीं आती..आती तब है जब हम अकेले में सिगरेट पी रहे होते हैं.."

ये लीजिये..तौबा..अब चुड़ैलें भी हुक्का पानी करने आने लगीं..एक दो सुट्टा लगवा देते उसे भी..पक्का फ्रेंदशिप..हो जाती..मियां" केसर भाई ने आँख मारते हुए कहा

"अमां..केसर भइया.. हँसिये मत..हुक्का आप भी पीतें हैं..जिस दिन आ गई न पायजामें में पानी आ जाएगा.. मजाक छोड़िए..कोई तरीका बताइए.. कैसे पीछा छुड़ाएं उससे..पिछले हफ्ते से पीछे पड़ गई है..सिगरेट की तलब भी अब बक्शी के तालाब में चली गई है हमारी..जब बर्दाश्त नहीं होता तो सुलगा लेते हैं...तो वो आ जाती है हमारी सुलगाने...कोई रास्ता बताओ..झाड़फूंक वाला है क्या कोई ..आपके जानने में.." वैधानिक छत पे उकड़ूं बैठते हुए पूछता है

"ये लो..अमां हमसे बेहतर कौन है जो..मनतर जनतर..जानता है..हमने तो बड़े बड़े जिन्नात काबू कर दिए..तो ये चुड़ैल की क्या औकात हमारे जलाल के सामने.." केसर भाई इमामबाड़े की तरह चौड़े होते हुए आगे बोले " देखिए वैदानिक मियां..अंदर की बात है..किसी से कहिएगा नहीं.. तुम्हारी भाभीजान पे भी पहले बहुत चुड़ैल आती थी..एक दिन बहुत आएं बाएं साएं बक रहीं थीं..उठा के छुरी..उस दिन जो हमने उनकी चोटी काटी..तब का दिन है और आजका.. चुड़ैल आना तो क्या..ख़ुद भी चियां के रहतीं हैं..पट्टे कट करवा दिया...अब तोते की तरह जो हम बोलें बस वो ही दोहराती हैं..तो मियां अबकी जब वो चुड़ैल तुम्हारे नज़दीक आए तो उड़ा दो कमज़र्फ की चोटी...दादी अम्मा कहतीं आईं हैं कि चुड़ैल की चोटी में उसकी जान होती है" केसर भाई ने बात खत्म की और अपने कमरे की ओर देखके तसल्ली करने लगे कि उनकी शरीके हयात ने कुछ सुना तो नहीं

वैधानिक उनकी सलाह मान वहाँ से रुखसत हुआ और कुड़िया घाट के एक सन्नाटे कोने में आकर सिगरेट सुलगाने लगा सिगरेट सुलगते ही लाल साड़ी में उल्टे पैर वाली चुड़ैल घूँघट से आधा मुँह ढके वहाँ प्रकट हुई और उसे डराके भयानक अट्टहास करने लगी "मारे जाओगे..सब मारे जाओगे..मरेगा तू जल्दी ही..मौत मौत..हाहाहा हाहाहा.."

वैधानिक को इतने दिनों में उसकी आदत हो गई थी तो वो इस बार कम डरता है "ठीक है ठीक है..मारे जाएंगे हम..पर तुम क्यों मारना चाहती हो हमें..और तुम्हारा नाम क्या है...चुड़ैल हो..पर उतनी डरावनी नहीं लगतीं..हो कौन तुम..

"डरावनी..डरावनी क्यों लगूँगी मैं..लखनऊ की चुड़ैल हूँ..यहाँ तो लोग गाली भी तमीज़ से देते हैं..तो चुड़ैल में थोड़ी नफ़ासत तो बनती है..मारे जाओगे आप..जल्दी मारे जाओगे आप.." चुड़ैल ने इस बार अट्टहास नहीं किया

वैधानिक कमर पे छुरी टटोलते हुए उसे बहलाने की कोशिश करते हुए कहता है "अच्छा तुमने अपना नाम तो बताया नहीं..क्या नाम है.तुम्हारा.. मरने से पहले मौत का नाम जानने का हक तो बनता है.."

चुड़ैल ने मरने वाले की आखिरी तमन्ना पूरी करते हुए नाम बता दिया "चेतावनी"

वैधानिक उसका नाम सुनकर एक पल को चौंका और अचानक से सबकुछ उसे समझ आ गया उसने उँगली में पकड़ी सिगरेट को होठों से लगाया और गोल्डन कश लेकर बोला "अलविदा"  और सिगरेट के सिर यानी फिल्टर को एक झटके से तोड़ते हुए दोनों हिस्सों को को ज़मीन पर फेंक दिया.. चुड़ैल सेकंड के सौवें हिस्से से भी कम समय में हवा में उड़ती राख की तरह छू हो गई।

वैधानिक चेतावनी: सिगरेट पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

~तुषारापात®