Sunday, 24 September 2017

तुम करार दो

तुम करार दो
अब न इंतज़ार हो
तुम करार दो

वो सुबह तो आए तारों की छाँव में
तुम विदा करा ले जाओ अपने गाँव में
मैं कुँवारी माटी तुम कुम्हार हो
अब न इंतज़ार हो

तुम करार दो

चाँद की अंगीठी पे ख्वाब के पतीले
भाप चाँदनी की करे नयन गीले
बिगड़ी रात को मेरी अब संवार दो
अब न इंतज़ार हो

तुम करार दो

कबसे जल रही थी मैं इस आग में
कोई चिंगारी नहीं अब राख में
मेरे भगीरथ तुम गंगा उतार दो
अब न इंतज़ार हो

तुम करार दो..............

#तुम_पुकार_लो #फीमेल_वर्जन
-तुषारापात®

Friday, 22 September 2017

मिली

बड़ी मिली जुली है ये जिंदगी जिंदगी
है उलझी कहीं तो कभी सुलझी सुलझी

कभी उड़ती रेत सी,बड़ी सूखी प्यासी
आँसूओं को पीती
कभी तर होकर,मन को बो कर
नई उमंगें जीती
कई रूप हैं,धूप है बदली बदली

बड़ी मिली जुली है ये जिंदगी जिंदगी....

कभी मैं ना जीती,कहीं न मैं हारी
पड़े पासे जैसे
इसके भंवर में , हथेली के चौसर पे
बिछे तारे ऐसे
बाजी है किस्मत की ये लगी लगी न लगी।

बड़ी मिली जुली है ये जिंदगी जिंदगी .....

#बड़ी_सूनी_सूनी_है(फीमेल_वर्जन) #मिली
-तुषारापात®

Thursday, 21 September 2017

नवरात्र

उत्तर को छोड़ दक्षिण गोल के होंगें यात्री
सूर्य अपने रथ पे लिए शारदीय नवरात्रि

#तुषारापात®

Friday, 15 September 2017

सुबह का सूरज

वो अकेले में रोता है और तुम्हारे सामने मुस्कुराता है
रात कैसी बीती ये सुबह का सूरज कभी नहीं बताता है

-तुषारापात®

Saturday, 9 September 2017

उँगलियाँ तेरी मेरी उँगलियों में उलझीं

उँगलियाँ तेरी मेरी उँगलियों में उलझीं
साँसों के तेरे ज़ोर से ज़ुल्फ़ें मेरी सुलझीं

लाल डिब्बे में अब एक हुआ अपना पता
लबों पे मेरे लगा के अपने होठों की मुहर
इश्क की चिट्ठियाँ तूने बदन पे लिक्खीं

उँगलियाँ तेरी मेरी उँगलियों में उलझीं.....

धड़कनों के शोर से नहीं जागे हैं ये
उनींदे अरमानों की नींद टूटी है आज
चूड़ियाँ कलाइयों में हैं बार बार खनकीं

उँगलियाँ तेरी मेरी उँगलियों में उलझीं.....

कोई खतरे का नहीं है अब नामोंनिशाँ
लाँघ जाऊँ जो तेरे साथ लाज की रेखा
माँग में एक,गाल पे कई लाल रेखाएं हैं चमकीं

उँगलियाँ तेरी मेरी उँगलियों में उलझीं.....

सितारे मिलते हैं सितारों से मुश्किल से
मोम के ये टुकड़े आसमाँ में जो चमकते
मन्नतों की शमाएँ हैं जो थीं कभी पिघलीं

उँगलियाँ तेरी मेरी उँगलियों में उलझीं
साँसों के तेरे ज़ोर से ज़ुल्फ़ें मेरी सुलझीं

-तुषारापात®

Monday, 4 September 2017

पश्चिम का सूर्योदय

"शर्मा..बहुत बड़ी नादानी कर रहे हो...रिटायर हो चुके हो..यहीं रहो ये सब कुछ बेचके..कहाँ अपने लड़के के पास जा रहे हो..." गुप्ता जी ने अपने चालीस साल पुराने दोस्त शर्मा के इलाहाबाद से दिल्ली शिफ्ट होने के फैसले पे ऐतराज जताते हुए कहा

शर्मा जी मुस्कुराए और बोले "भाई गुप्ता..बच्चों के बगैर दिल नहीं लगता...जिंदगी के पूरे दिन तो उन्हें पालने पोसने में लगा दिए..अब जिंदगी की आखिरी कुछ शामें बच्चों और उनके बच्चों के साथ भी न बिताने को मिले तो क्या फायदा..वैसे भी अब हम और तुम्हारी भाभी दिन पर दिन कमजोर हो रहे हैं..बेटे के पास रहेंगे तो वो खयाल रखेगा रात बिरात दवा दारू के लिए भागना अब मुझसे नहीं हो पाता"

"भूल गए वो रमन लाल का क्या हश्र किया था उसके बेटे और बहू ने...वो भी तुम्हारी तरह सब कुछ बेच के गया था...खाली हाथ लौटा और अब दोनों बुढ्ढे बुढ़िया यहीं किराए पे रह रहे हैं" गुप्ता ने तीखे स्वर में ऐसे कहा मानो उन्हें कोई अपना पुराना जख्म याद आ गया हो

"नहीं भाई गुप्ता...मेरा बेटा ऐसा नहीं है...पता है जब उसकी नौकरी इंफोसिस में लगी थी...उसने हमारे पैर छूते हुए कहा था कि पापा..मम्मी ये आप लोगों के कारण ही मैं आज यहाँ पहुँचा हूँ..और मैं ये बात कभी भूल नहीं सकता कि आप लोगों ने कितनी तकलीफों से मुझे पाला है...गुप्ता..वो और मेरी बहू बहुत अच्छे हैं मुझे यकीन है वो हमारा ख्याल अच्छे से रखेंगे.." शर्मा जी थोड़ा भावुक होते हुए बोले

गुप्ता ने बुरा सा मुँह बनाते हुए कहा "मुगालते में हो शर्मा..ये आजकल के लड़के..बहुएं..माँ बाप को नौकर बना के रखते हैं...ऐसी बेतुकी बाते तुम मुझसे तो मत ही करो..अक्ल से काम लो..तुम पश्चिम में सूरज उदय होने जैसी बात कर रहे हो..पछताओगे एक दिन.."

"ठीक है यार कुछ हुआ तो तेरा घर तो रहेगा ही मेरे लिए..वैसे ये मेरे बेटे की नहीं..मेरे दिए संस्कारों की परीक्षा है..अब देखना है कि क्या मैं इसमें पास होता हूँ या फिर..." शर्मा जी गुप्ता से गले लगते हुए भावुक स्वर में बोले और फिर अपनी पत्नी के साथ दिल्ली के लिए निकल गए

आज शर्मा जी को दिल्ली आए एक साल हो गया है उनके बेटे बहू दोनों जॉब करते हैं..वे दोनों अपनी अपनी कंपनी में बहुत ऊँची पोस्ट पे पहुँच चुके हैं...शर्मा और उनकी पत्नी घर मे अपने  पोते के साथ खेलते जिंदगी की शामें सुख से बिता रहे हैं

"पापा..एक खुशखबरी है..मुझे कंपनी से बहुत बड़ा ऑफर मिला है..मैं अपनी कंपनी से छः महीने के लिए अमेरिका जा रहा हूँ...आई टी इंडस्ट्री में ये मौका बहुत कम लोगों को मिलता है..हाँ कहने से पहले सोचा आपसे पूछ लूँ " शर्मा जी के बेटे राघवेंद्र ने सबसे पहले ये खुशखबरी अपने पिता को सुनाई

शर्मा जी ने गदगद होते हुए कहा "वाह बेटा ये तो बहुत फक्र की बात है..तेरे पापा मम्मी तो कभी यू.पी के भी बाहर नहीं निकले...और हमारे बेटे को सीधे अमेरिका जाने का मौका मिल रहा है..सब जगदम्बा की कृपा है..जरूर जाओ बेटा"

राघवेंद्र अमेरिका चला जाता है उसके पीछे शर्मा जी की बहू वैदेही ने उनकी जिम्मेदारी बहुत अच्छी तरह से संभाल ली और तीन महीने यूँ ही बीत गए एक दिन शर्मा जी के बेटे का अमेरिका से फोन आता है

"पापा..आपको याद है एक बार संगम के मेले में..एक हवाई जहाज वाला बड़ा सा झूला लगा था...वो जिसका चार्ज एक आदमी के लिए दो रुपैये था उस वक्त..उसमें कई बच्चे अपने अपने पापा मम्मी के साथ बैठ के झूल रहे थे...मैंने भी आपसे जिद की थी कि मुझे आपके साथ बैठना है..पर आपने मुझे किसी और अंकल के साथ बिठा दिया था.. मैं झूले में तो बैठा था पर बाद में आपसे बहुत गुस्सा हुआ था कि आप साथ में क्यों नहीं बैठे थे..पर बड़े होके मुझे समझ आ गया था कि आपके लिए उस समय दो रुपैये भी बहुत होते थे" राघवेंद्र का गला रुंध आया,उसने आगे कहा "पापा मेरी अमेरिका से वापसी का समय पास आ रहा है...आप मना मत करना..मैंने वैदेही को सब समझा दिया है वो वीजा टिकेट वगैरह का इंतजाम कर लेगी..आप और मम्मी वैदेही और कुशेन्द्र के साथ अमेरिका घूमने आ जाओ..वापसी हम सब साथ मे करेंगे...मैं इस बार अपने मम्मी पापा के साथ सच के हवाई जहाज में बैठना चाहता हूँ" राघवेंद्र की बात सुनकर शर्मा जी के गाल आँसूओं से भीगे चले जा रहे थे..वैदेही उनके पास खड़ी थी उसे फोन पकड़ा के वो घर के मंदिर में माँ अम्बे के पास नयनों में भर आए जल का अर्पण करने चले गए

आखिर वो दिन भी आता है जब शर्मा जी सपरिवार अमेरिका में राघवेंद्र के पास पहुँच जाते हैं और रात में आराम करने के बाद वहाँ की पहली सुबह देख रहे होते हैं वो राघवेंद्र से इलाहाबाद गुप्ता का नंबर मिलाने को कहते हैं

"हेल्लो कौन? अरे..हाँ शर्मा..बोल कैसा है..सब ठीक तो है..बड़े दिनों बाद याद आई.." इलाहाबाद में संगम के पश्चिमी किनारे पर सूरज डुबोते हुए गुप्ता ने एक साँस में कहा

इधर शर्मा ने अमेरिका से कहा "सब ठीक है गुप्ता..अमेरिका में हूँ..अपने बेटे के साथ 'पश्चिम' में सूरज को उगता देख रहा हूँ।"

-तुषारापात®

Friday, 1 September 2017

ऑफिस लव

एक बार कहा था उसने
यूँ ही हँसी हँसी में
कभी तुम्हारे साथ डिनर करेंगे
लंच पे भला क्यों बहक रहे हैं

और जमाना ले उड़ा वो बात
दोस्तों ने भी खूब खिंचाई की
उस एक हँसी ठिठोली के
कई किस्से अब तक महक रहे हैं

लंच में खिचड़ी खाती थी
डाल के मक्खन मेरे साथ
अब उसकी लाज के चावल
किसी और घी में लहक रहे हैं

हमसे मत पूछो 'तुषार'
क्या हुआ था हमारा हाल
कई ख्याली पुलाव पके थे
आँख के चूल्हे अब तक दहक रहे हैं

-तुषारापात®

Tuesday, 29 August 2017

कायर

पत्थर के बदले फल देने वाले पेड़ को बाँझ झाड़ियाँ कायर कहती हैं।

-तुषारापात®

Saturday, 26 August 2017

आस्था की आँखें

"बाबा जी..बाबा जी नमस्ते...मेरे पति बहुत बीमार हैं..अपना आशीर्वाद हमे प्रदान करें..बाबा जी उन्हें जल्दी से अच्छा कर दीजिए" माइक पकड़ते ही आस्था ने रोते रोते बाबा जी के दरबार मे गुहार लगाई, बाबा हजारों भक्तों की गोलाकार भीड़ से कोई दो सौ मीटर की दूरी पर बने एक ऊँचे सिंहासननुमा आसन पे बैठे थे उनकी सफेद रंगी दाढ़ी जो कि वास्तव में काली थी उनके चारों ओर लगे स्टैंडिंग एसीयों  की ठंडी हवा से हल्के हल्के उड़ रही थी आस्था की पुकार सुनते ही वो अपनी बड़ी गोल आँखों से उसे देखते हुए रटे रटाये शब्द बोलते हैं "चिंता मत कर बेटी...सब ठीक होगा..कल्याण होगा"

आस्था रुआंसे स्वर में बोली "बाबा जी..उनका बड़े डॉक्टर के पास इलाज चल रहा है डॉक्टरों का कहना है आधे आधे चांस हैं..आपकी कृपा हो जाती तो.." अभी वो अपनी बात पूरी कर भी नहीं पाती है कि पास खड़े बाउंसर टाइप का शख्स उसके हाथ से माइक छीन के दूसरे व्यक्ति को थमा देता है बाबा आस्था के लिए आशीर्वाद की मुद्रा में अपना दायाँ हाथ उठाते हैं और अगले ग्राहक मतलब भक्त की ओर चेहरा कर लेते हैं

पाँच हजार रुपये 'दान' करके वह अस्पताल में अपने पति के पास आती है उसका पति विश्वास कुछ बोलने की स्थिति में नहीं है,विश्वास के बेड के पास बैठे उसके ससुर सेठ सूरदास ने उससे कहा "बहू..हो आई बाबाजी के पास क्या कहा उन्होंने..वैसे तो मैं ही जाता उनके दर्शनों को..पर सुना है वो औरतों की फरियाद जल्दी सुनते हैं..तो तुझे भेजा था.. जल्दी ही उनके आशीर्वाद से विश्वास ठीक हो जाएगा .. हाँ..ये साले डॉक्टर पता नहीं क्या ऑपरेशन वगैरह बता रहे हैं..चल तो मेरे साथ जरा डॉक्टर विवेक के पास"

वह अपने ससुर के साथ डॉक्टर के केबिन में पहुँचती है कुछ देर इंतजार करने के बाद वो और उसके ससुर डॉक्टर विवेक के सामने बैठे हुए थे

उसके ससुर ने डॉक्टर से पूछा "कौन सा ऑपरेशन बता रहे थे आप?"

"देखिए सूरदास जी..आपके बेटे की स्प्लीन से खून रिस रहा है इसके लिए हमे एक विशेष तरह का ऑपरेशन करना पड़ेगा जिसमें उसकी पैर की नस के रास्ते एक पतला तार डाल कर स्प्लीन में खून बहने की जगह को ब्लॉक किया जाता है" अनुभवी और बेहद ईमानदार बड़े डॉक्टर विवेक ने उन्हें एम्बलॉइज़ेशन को सरल शब्दों में समझाते हुए कहा

"इस ऑपरेशन की कितनी गारंटी है? मतलब इसके बाद विश्वास ठीक तो हो जाएगा ?

"अब गारंटी तो मैं नहीं ले सकता मगर 90 फीसदी केसेस में मरीज पूरी तरह ठीक हो जाता है"

"पैसा कितना लगेगा डॉक्टर साहब" सेठ ने सीधे स्वर में डॉक्टर से पूछा

"अ..जी देखिए ये थोड़ा महँगा ऑपरेशन है पहले तो इसमें लाखों रुपये लगते थे पर अब ये काफी सस्ता हुआ है ..आपके केस में एक लाख पचीस हजार के आसपास लगेगा ये मान के चलिए..."

आस्था जानती थी कि ये उसके धनाढ्य परिवार के लिए कोई खास रकम नहीं है तो जल्दी से हाँ कहने वाली थी पर उसके ससुर ने उसे चुप रहने का इशारा कर डॉक्टर से कहा "ये तो बहुत ज्यादा है..डॉक्टर साहब कुछ गुंजाइश हो जाती तो.. "

"ठीक है अगर आपको पैसों की दिक्कत है तो मैं अपनी फीस छोड़ देता हूँ..आप एक लाख जमा कर दीजिए..." डॉक्टर विवेक ने उनसे यह कहा एक पर्चा लिखा और अपने काम मे व्यस्त हो गया

सेठ जी डॉक्टर के केबिन से निकलते ही आस्था से बोले "देखा बहू कैसे इन कांइयां डॉक्टरों को सीधा किया जाता है..ला ये पर्चा मुझे दे..और तू विश्वास के पास जाकर बैठ..मैं रुपैया जमा करा के आता हूँ"

अगले दिन विश्वास का ऑपरेशन होता है और वो सफल रहता है चार दिनों के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है सेठ सूरदास उसे लेकर बाबा जी के आश्रम पहुँचते हैं और बाबा के चरणों मे गिरकर कहते हैं "बाबा जी ये मेरा बच्चा विश्वास आपकी ही कृपा से ठीक हुआ है..आपकी सदा जय हो..."

"तुम्हारी बहू नहीं आई" बाबा ने अपनी दाढ़ी सहलाते हुए पूछा

"जी वो जरा...इन दिनों..अशुद्ध...मतलब बीमार है" विश्वास ने सकुचाते हुए कहा

इसी बीच सेठ सूरदास ने अपने बैग से 2000 के 25 नोटों की एक गड्डी निकालकर बाबा की ओर बढ़ाई "एक भक्त की ओर से ये छोटी सी भेंट स्वीकार करें"

बाबा ने आशीर्वाद देने को बढ़ाया अपना हाथ पीछे करते हुए कहा "न न बच्चा..हम माया को हाथ भी नहीं लगाते..ये सहजयोगी परमानंद जी को दे दो" सेठ जी ने पास खड़े उनके सहयोगी को नोटों की गड्डी दे दी बाबा ने आशीर्वाद की मुद्रा में अपना दायाँ हाथ ऊपर उठाते हुए कहा "अगली बार अपनी बहू को भी आशीर्वाद हेतु अवश्य लाना"

"जी बाबा जी" डॉक्टर की 'कांइयांगिरी' पकड़ने वाले चतुर सेठ ने यहाँ कोई प्रश्न न किया और बाबा के चरणों में अपना और अपने पुत्र का मत्था टेक दिया।

आस्था और विश्वास जब विवेक का साथ छोड़ते हैं तो सूरदास हो जाते हैं।

-तुषारापात®

Wednesday, 23 August 2017

हिसाब

चाँद पे चाकू चला के/बाँटता हूँ रोज/कुछ इस तरह
तेरे आसमाँ में आए/जलता हुआ/मेरे में आए पूरा बुझा हुआ

#तुषारापात®

Tuesday, 22 August 2017

तीन तलाक़

ख़्वातीनों से पेश आइये ज़रा इज्ज़त से हज़रात
कानून के हथौड़े ने हलाक किया है तीन तलाक़

#तुषारापात®

फतवा

रोज नज़र आता था,आज नहीं आया
चाँद पे जारी हुआ किसी सरफिरे का फतवा है

अमावस नहीं,ये बुरके से किसी ने इसे ढका है

-तुषारापात®

Saturday, 19 August 2017

पैबंद

मन्नतों के रॉकेटों से किए हमने उसकी झोली में सुराख़ इतने
कि ख़ुदा को अपने आसमाँ पे सितारों के पैबंद लगाने पड़ गए

-तुषारापात®

Friday, 4 August 2017

इंद्रधनुष

पथ से मुझे रपटा कर
हो रहा तू अति प्रसन्न!
देवताओं के राजा!
अपना धनुष दिखा कर
मत कर शक्ति प्रदर्शन!

वर्षा वृष्टि द्वारा
कर तू मार्ग जलमगन
नौका का निर्माण कर
करूँगा मैं पथगमन

मेघों की गर्जना से
काँपते नहीं 'सिंह' के पैर
देवेंद्र होकर रखता तू
एक मानव मात्र से बैर

स्वर्गों की नहीं
चाह मुझे न कामना
मेरा लक्ष्य तुझे
तेरा राज्य लाँघना

मैंने बैर लिया है
संसार के स्वामी से
मेरे अंतर की पीड़ा
न पढ़ने वाले अंतरयामी से

मैं एक हूँ और वो है एक
फिर क्यों मैं तुच्छ वो है श्रेष्ठ
पिता है वो तो मैं हूँ उसीका पुत्र
तेरा क्या तू है मात्र सेवक ज्येष्ठ

मत बन अवरोधक
मत भूल अरे दुष्ट!
मेरे यज्ञ की भिक्षा से
होता आया तू पुष्ट!

दे दिया था दान तुझे
पहले ही अपना आसन
बैठता गर्वित हो तू जिसपर
कहलाता वो आज भी 'सिंहासन'

बंद कर अपना यह जलाघात
मत दिखा मुझे यह इंद्रधनुष
खंडित होगा निमिष मात्र में
प्रचंड 'तुषारापात' है यह मनुष!
प्रचंड 'तुषारापात' है यह मनुष!

-तुषारापात®

Monday, 31 July 2017

पाउडर

आसमाँ की पीठ पे
फेरो जो हाथ
तो दरदारती हैं
सितारों की पट्टियाँ

रात को चमकते हैं
गुनाह सूरज के
धूप से हुईं हैं ये
आसमाँ को घमौरियाँ

चाँद के डब्बे से
कोई पाउडर लगाता है
आसमाँ की पीठ पे
छाईं हैं सुफेद बदलियाँ।

-तुषारापात®

घमौरियाँ

सितारे
धूप से पैदा हुईं
घमौरियाँ हैं
आसमाँ की पीठ पे
पाउडर लगा गया कोई
बहुत से सफेद बादल आज छाए हैं।

-तुषारापात®

Saturday, 29 July 2017

चराग़

यूँ पलकें झपका के,कहीं,किसी का रस्ता तकते हैं?
तुम्हें देखने की मुराद में,हम आँखों के चराग़ मलते हैं

-तुषारापात®

Thursday, 27 July 2017

मेरा कुछ सामान (मेल वर्जन)

मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास पड़ा है
जेठ की तपती दोपहरियां हैं कुछ
पानी की बोतलों पे चिपके होंठ पड़े हैं
वो निशान मिटा दो मेरा वो सामान लौटा दो

बहारें हैं कुछ,देखो,हैं न
पेड़ों के नीचे कुचले वो पीले फूल पड़े हैं
मेहंदी से पहले जिनसे हथेलियां पीली की थीं
वो रंग छुटा दो,मेरा वो सामान लौटा दो

एक सौ सत्रह बरसातें,एक तुम्हारी तौलिये पे बिंदी
सौंधी सौंधी ज़ुल्फ़ की खुशबू,नींबू वाली चाय की चुस्की
जलते स्टोव की आँच में मेरे कुछ अरमान पके थे
वो अरमान दबा दो,मेरा वो सामान लौटा दो

एक अकेली चादर में जब आधे आधे जाग रहे थे
आँखें मूँदें,लब चूमें,आधी आधी बाहों में थे पूरे पूरे
सर्दियों की उस रात जो पी लीं थीं तुमने
मेरी वो साँसे कम पड़ गईं हैं
वो भिजवा दो,मेरा वो सामान लौटा दो

एक इज़ाजत दी थी तुमको
वो वापस भिजवा दो
या मुझको भी साथ दफ़ना लो।

-तुषारापात®

Tuesday, 25 July 2017

आलू टमाटर

टमाटर सौ के पार हुआ पर आलू
रुपैये बीस में दो किलो आते क्यों हैं?

उनके टमाटर जैसे रुख़सारों पर
ज़माने भर के आलूओं की आँखें जो हैं।

-तुषारापात®

Monday, 24 July 2017

बिरहम्मा

दिल में लहू की बगावत के जैसे
तुम मुझमें हो मेरी ख़िलाफ़त के जैसे

पैरों में बाँध के जरूरत के घुँघरू
ज़िंदगी नाचती है तवायफ़ के जैसे

वो बुदबुदाता है पाँचों वक्त आयतें
ख़ुदा के कानों में शिकायत के जैसे

लगके गले पीठ ख़ंजर से थपथपा के
मोहब्बत दिखाता है अदावत के जैसे

चढ़ती जवानी का है ये मुआमला
दबे पाँव उतरती शराफत के जैसे

दफ़्न है मुमताज़ शाहे जहाँ के सीने में
दिल है ताजमहल की बनावट के जैसे

के काफ़िरों ने ईज़ाद करके इक नया ख़ुदा
मोमिनों से किया हिसाब क़यामत के जैसे

तू शायिर है 'तुषार' बिरहम्मा तो नहीं
लिखेगा ख़ाक उसकी लिखावट के जैसे

#तुषारापात®