Sunday, 8 July 2018

आग का साया

किसी के साये में महफूज़ रहने वाले जान ले जरा
परछाइयों के वजूद के लिए कोई सुलगता भी है

#तुषारापात®

Tuesday, 3 July 2018

बुढ़िया वांटेड है जो चरखा कातती है

आसमाँ पे चिपका है
एक गोल पोस्टर
बुढ़िया वांटेड है जो चरखा कातती है

रात काली पिस्तौल है
सन्नाटे का साइलेंसर लगा के
ख्वाबों को दागती है

दिल का फ्यूज
बार बार उड़ता है
कोई कोई ही सही करंट मारती है

प्यार के दाग अच्छे हैं
सफेद शर्ट को लिपस्टिक
आँख मारती है

दिल बड़ी 'चीज' है क्या
बड़े नाखूनों वाली उँगलियाँ
डबल चीज़ पिज्ज़ा रोज काटतीं हैं

उसके दाँत हैं
टाइपराइटर के फॉन्ट
लफ्ज़ छपते हैं मेरे गालों को जब काटती है

मेरी किस्मत
यूँ ही नहीं चमकी है
लेखनी रोज सितारों को स्कॉच ब्राइट से माँजती है

अच्छा लिखता है 'तुषार'
मगर कमेंट तुम वहीं करना
जो रोज़ एक नई फोटो डालतीं हैं

#तुषारापात®

Sunday, 17 June 2018

आँसू और पसीना

पिता की आँखों मे कभी कभी दिखती है
उनकी कमीजों में हमेशा नमी दिखती है

~तुषारापात®

Sunday, 10 June 2018

भीगी मुस्कान

पलकों के बाँधों में बंधी रहती है
आँख की नहर भीतर बहती है

लब खिंचे रहते हैं कानों तक
शाम के कहकहे सुबह सहती है

~तुषारापात®

Thursday, 7 June 2018

गर्मी की छुट्टियाँ

लाइक और कमेंट के इन नंबरों में-

नानी का 'एक' घर

बेलाइट की 'दो'पहर

खड़ी 'चार'पाई की रेल

'तीन' दो 'पाँच' का खेल

लूडो का पौ 'छह',कैरम की क्वीन

निन्यानबे पे डराता वो साँप बगैर बीन

'सात' पत्थरों का गिट्टी फोड़

माँ का बेफिक्री से पड़ोस में हमें देना छोड़

पहेलियों पे एक दूसरे से हारी मनवाना

मामा की लाई हुई नई कॉमिक्स चुराना

छोटे से कमरे में 'आठ' 'दस' लोगों का साथ

सब 'नौ' दो 'ग्यारह' हो गए कहाँ ले बैठे पुरानी बात।

~तुषारापात®

Wednesday, 6 June 2018

ख़ुदा के पास जाना है?

एक कदम पे है एक ख़ुदा का घर और दूसरे कदम पे दूजा
रास्ता भटक गईं हैं मंजिलें मुसाफिर चादर तान के सो जा

~तुषारापात®

Sunday, 3 June 2018

जादू

हैट से खरगोश निकालने से कहीं बढ़कर जादू, मायके गई बीवी का अपने पर्स में मोबाइल ढूँढकर पति की कॉल उठाना है।

~तुषारापात®

Monday, 28 May 2018

ज़मज़म

पहाड़ पे आबे ज़मज़म देखा
उसके तकिये को नम देखा

*आब-ए-जमजम = मक्का के कुएं का पानी
~तुषारापात®

Saturday, 26 May 2018

हज़ारदास्ताँ

हज़ार अफ़साने हैं तुझ हज़ारदास्ताँ के
अव्वल तू वो सुना जहाँ से शामिल मैं हूँ

~तुषारापात®

Friday, 25 May 2018

स्ट्रीट लाइट और ईसा

रोशनी देने वाले टांग दिए जाते हैं खम्बों पे
स्ट्रीट लाइट दिखतीं हैं मुझे ईसा की तरह

~तुषारापात®

Tuesday, 22 May 2018

स्वाहा

देवताओं के लिए स्वाहा और राइटरों के लिए वाह वाह बहुत जरूरी है।

~तुषारापात®

Friday, 18 May 2018

लबों का पानदान इश्क का बीड़ा कत्थई आँखें लग गया चूना

लबों के पानदान से इश्क का बीड़ा चखाते हैं
वो अपनी कत्थई आँखों से खूब चूना लगाते हैं

~तुषारापात®

Wednesday, 16 May 2018

चचा गुस्ताख़ी मुआफ़

मुहब्बत में नहीं है काम अमित शाह होने से
उसी को अक्लमंद कहते रहेंगें भले राहुल गाँधी सनम निकले

-तुषारापात®

Monday, 14 May 2018

डी वी डी

ख़्वाब अटके हैं रात की स्क्रीन पे
चाँद की डी वी डी पे स्क्रैच बहुत हैं

~तुषारापात®

Thursday, 10 May 2018

चाँद के सितारे खराब हैं

उधार की रोशनी पे है चमकता
चाँद के जरूर सितारे खराब हैं

#तुषारापात®

Tuesday, 8 May 2018

शायर

वो शायर है नहीं मानेगा कि उसपर कंगाली है
जेब मे कलम लगा के कहेगा कि कहाँ खाली है

#तुषारापात®

शर्ट की जेब

जेब,तेरी ज़िन्दगी की तरह,पहले से ही खाली थी
और 'तुषार',ऊपर से तूने इसमें,कलम और लगा ली

#तुषारापात®

Sunday, 6 May 2018

कंदील

खाक के तेल से रौशन कंदील
मेरे चाँद से आज मुकाबिल है
जो जलता है आसमाँ के सीने में
वो सूरज नहीं हमारा दिल है

#तुषारापात®

Saturday, 5 May 2018

जनहित में जारी

लगा रहें हैं पोछा घर का फर्नीचर उठा उठा के
इतरा रहा है इतवार इश्क का शनिश्चर चढ़ा के

~तुषारापात®

Friday, 4 May 2018

हार जीत

तुम्हें
हराने की कोशिश
खामख्वाह न थी

ये
साजिश थी
तुम्हें जिताने की

तुम्हें
हार पहना के
तो लाए हैं

मगर
ये जीत है
ऐसी हमारी

तुम्हारे
नाम के 'पीछे'
अपना नाम लगाने की

~तुषारापात®