Sunday, 11 March 2018

प्रोफाइल

तुम्हारी प्रोफाइल देखी
और देखीं कई ब्लैक एंड वाइट तस्वीरें वहाँ
तुम्हारे भीतर का सुनहरा अँधेरा दीप्त था

तुम्हारी प्रोफाइल देखी
और देखीं कई सारी रचनाएँ तुम्हारी
कलम किसी पशोपेश में शायद लिप्त था

तुम्हारी प्रोफाइल देखी
और देखीं कई कवियों की कविताएं वहाँ
न जाने क्यों कलाकारों का वो डेरा सुप्त था

तुम्हारी प्रोफाइल देखी
और जागी तुम्हारी वाल पे आने की प्यास
मैं अपने प्रशंसकों से अब तक तो तृप्त था

~तुषारापात®

गुलाबी इतवार

दिले नादां,बचपने वाला ढूँढता है क्यूँ,अब तो तेरी जवानी है
इतवार की लाली उड़ गई तो क्या,रंगत अब इसकी गुलाबी है

वक्त की धूप,जिंदगी के रंग फीके कर गई,ये आम कहानी है

~तुषारापात®

Saturday, 10 March 2018

नजर के तीर, आँखों के धनुष और लटों की डोरी

ये तो
तुम जानते ही होगे
कि
धनुष की डोरी
खींचने और छोड़ने से
तीर
निशाने पे जा लगते हैं
और ये भी
सब जानते ही हैं
कि
आँख के धनुष से
छोड़े गए
नजर के टेढ़े तीर भी
दिलों पे सीधे सीधे लगते हैं
मगर
क्या तुम ये जानते हो
कि
नजर के तीर भला
किस डोरी से चलते हैं
अभी अभी
दिल मेरा
ताजा ताजा
निशाना बना है
मेरे सामने बैठी उसने
बार बार
चेहरे पे आतीं
अपनी लटें
कानों पे चढ़ा के
हर बार मुझे देखा है।

~तुषारापात®

जायदाद

मेरी जायदाद बढ़ने के मशहूर किस्से हुए
मेरे तीन बेटे थे मेरे घर के चार हिस्से हुए

~तुषारापात®

मुक़द्दर की जलेबियाँ-हथेलियाँ

जब भी चूमा है हथेली को ये कसैली लगी है
मौला तूने कैसी ये मुक़द्दर की जलेबी लिखी है

~तुषारापात®

जिंदगी का जूता

नंगे पैर आते हैं हम नंगे पैर जाते हैं
पर ज़िंदगी तेरे जूते बहुत काटते हैं

~तुषारापात®

चाय की प्याली

मेरे
बाएं कान में
अपने दाएं हाथ की
उंगलियाँ फँसा के
वो
हौले हौले
छू रहा है मुझे
चाय की प्याली की तरह

~तुषारापात®

Friday, 9 March 2018

चुंगी

आँखों की चुंगियाँ बंद करके
आओ ख़्वाबों की तस्करी करें

~तुषारापात®

Monday, 5 March 2018

काली सफेद

उड़ गए हैं सारे रंग इस बरस भी होली में
जिंदगी फिर काली सफेद है फिर वही शतरंज की बिसात है।

-तुषारापात®

Tuesday, 27 February 2018

शाम

किसी भी लिबास में उतरे ये शाम
उदासी के बुर्के में लिपट जाती है

उम्मीद का अपना सूरज डूब गया
रात किस्मत के सितारों से चिढ़ाती है

#तुषारापात®

Wednesday, 21 February 2018

तरकीबें

साइंसदानों ने बताई दुनियादारी
ऊपर उठने की तरकीबें सारी
हल्के कागज़ों ने पा लीं मंज़िलें
भारी कलमों के हैं दिल भारी

#तुषारापात®

Saturday, 17 February 2018

मुक़द्दर

वो हथेली से अपनी,हथेली मेरी रगड़ रहा था
मेरी खाली लकीरों में अपना मुक़द्दर भर रहा था

#तुषारापात®

Thursday, 15 February 2018

ग़ालिब

तुझे याद करने से अश्क नहीं हैं छलके ग़ालिब
बल्लीमारां की उड़ती ख़ाक आँख में चुभ रही है

-तुषारापात®

Friday, 26 January 2018

मोबाइल देशभक्ति

बीच दरिया की बातें बतलाता साहिल पे है
देखना है कितनी देशभक्ति तेरे मोबाइल में है

-तुषारापात®

Sunday, 14 January 2018

उत्तरायण

कब फेरोगे मेरे सजन जी हमारी ओर नयन
उत्तर की ओर चले सूर्य सुन भारतभूमि का ये प्रशन

#तुषारापात®

Saturday, 13 January 2018

चाँद का वादा

महीने में एक पूरा बाकी दिन अधूरे...उसके वादे बड़े हसीन थे...चाँद जैसे थे

Thursday, 11 January 2018

वो

बात कायदे की थी सबके फायदे की
तो क्यूँ वो एक के कानों में कहता
जो बेहतर बनी होती उससे दुनिया
तो क्यों कर वो आसमानों में रहता

-तुषारापात®

Monday, 1 January 2018

दो शून्य

नया तो तब होगा कुछ,जब दहाई से सैकड़ा होगा
नहीं तो दो शून्य एक साथ थे,दो शून्य एक हाथ हैं

-तुषारापात®

Sunday, 31 December 2017

नाबालिग सदी

नाबालिग है अभी भी चाहे उन्नीस बीस से ही हो
अठारहवाँ लगा है साल अभी इक्कीसवीं सदी को

-तुषार सिंह #तुषारापात®

Thursday, 28 December 2017

किस्मत की चवन्नी

जिन्हें किस्मत की चवन्नी नहीं मिलती,जीवन की दौड़ में उनकी मेहनत के सोलह आने,बारह आने बन लंगड़ाते हैं।

-तुषारापात®