Saturday, 10 March 2018

चाय की प्याली

मेरे
बाएं कान में
अपने दाएं हाथ की
उंगलियाँ फँसा के
वो
हौले हौले
छू रहा है मुझे
चाय की प्याली की तरह

~तुषारापात®

Friday, 9 March 2018

चुंगी

आँखों की चुंगियाँ बंद करके
आओ ख़्वाबों की तस्करी करें

~तुषारापात®

Monday, 5 March 2018

काली सफेद

उड़ गए हैं सारे रंग इस बरस भी होली में
जिंदगी फिर काली सफेद है फिर वही शतरंज की बिसात है।

-तुषारापात®

Tuesday, 27 February 2018

शाम

किसी भी लिबास में उतरे ये शाम
उदासी के बुर्के में लिपट जाती है

उम्मीद का अपना सूरज डूब गया
रात किस्मत के सितारों से चिढ़ाती है

#तुषारापात®

Wednesday, 21 February 2018

तरकीबें

साइंसदानों ने बताई दुनियादारी
ऊपर उठने की तरकीबें सारी
हल्के कागज़ों ने पा लीं मंज़िलें
भारी कलमों के हैं दिल भारी

#तुषारापात®

Saturday, 17 February 2018

मुक़द्दर

वो हथेली से अपनी,हथेली मेरी रगड़ रहा था
मेरी खाली लकीरों में अपना मुक़द्दर भर रहा था

#तुषारापात®

Thursday, 15 February 2018

ग़ालिब

तुझे याद करने से अश्क नहीं हैं छलके ग़ालिब
बल्लीमारां की उड़ती ख़ाक आँख में चुभ रही है

-तुषारापात®

Friday, 26 January 2018

मोबाइल देशभक्ति

बीच दरिया की बातें बतलाता साहिल पे है
देखना है कितनी देशभक्ति तेरे मोबाइल में है

-तुषारापात®

Sunday, 14 January 2018

उत्तरायण

कब फेरोगे मेरे सजन जी हमारी ओर नयन
उत्तर की ओर चले सूर्य सुन भारतभूमि का ये प्रशन

#तुषारापात®

Saturday, 13 January 2018

चाँद का वादा

महीने में एक पूरा बाकी दिन अधूरे...उसके वादे बड़े हसीन थे...चाँद जैसे थे

Thursday, 11 January 2018

वो

बात कायदे की थी सबके फायदे की
तो क्यूँ वो एक के कानों में कहता
जो बेहतर बनी होती उससे दुनिया
तो क्यों कर वो आसमानों में रहता

-तुषारापात®

Monday, 1 January 2018

दो शून्य

नया तो तब होगा कुछ,जब दहाई से सैकड़ा होगा
नहीं तो दो शून्य एक साथ थे,दो शून्य एक हाथ हैं

-तुषारापात®

Sunday, 31 December 2017

नाबालिग सदी

नाबालिग है अभी भी चाहे उन्नीस बीस से ही हो
अठारहवाँ लगा है साल अभी इक्कीसवीं सदी को

-तुषार सिंह #तुषारापात®

Thursday, 28 December 2017

किस्मत की चवन्नी

जिन्हें किस्मत की चवन्नी नहीं मिलती,जीवन की दौड़ में उनकी मेहनत के सोलह आने,बारह आने बन लंगड़ाते हैं।

-तुषारापात®

Sunday, 24 December 2017

बड़ा दिन

कैलेंडर रंगभेद करता है,लाल और काले में यहाँ
दिन भी होता है बड़ा और छोटा,आदमी की तरह

-तुषारापात®

बड़ा दिन

मकर संक्रांति तो हम पिछड़े लोगों की बातें हैं
दिन बड़ा होने का जश्न वो लंबी रातों में मनाते हैं

-तुषारापात®

Tuesday, 19 December 2017

जीवन

इस वन में बसन्त कभी,कभी पतझड़ा होता है
पर सावन में गिरे पत्तों का दर्द पौष में हरा होता है

-तुषारापात®

दिसम्बर की चोट

सर्द मौसम में उभर आते हैं जून के हल्के दर्द भी
और ये चोट तो दिसम्बर की है न जाने कितना पिराएगी

-तुषारापात®

Monday, 18 December 2017

ख़तों की राख से इश्क़ दफ़ना दिया है मैंने

मैं था बेवफा सबसे ये कहला दिया है मैंने
तुम्हारे हक़ में काम ये पहला किया है मैंने

नाम अब भी आता है तुम्हारा लबों पे मगर
दीवार के कानों को अब समझा दिया है मैंने

कि तुम्हारा कोई भी नामोनिशां न बाकी रहे
ख़तों की राख से इश्क़ दफ़ना दिया है मैंने

जाने तुम मनाओ न मनाओ मौत के बाद की रस्में
जीते जी अपना तेरहवीं दसवाँ करवा दिया है मैंने

ऐसा भी नहीं कि हाथ अपना सीने तक न पहुँचे
जरा सी बात थी दिल को बहला दिया है मैंने

धड़कने जब जब तेरे नाम पे तेज हुईं हैं 'तुषार'
काँधे के एक बालिश्त नीचे सहला दिया है मैंने

-तुषारापात®

Friday, 15 December 2017

टूटन

कुछ टूटा हुआ जब भी मुझमें खनकता है
कलम कागज़ पे हर्फ़ हर्फ़ जोड़ने लगता है

-तुषारापात®